
न्यूज डायरी: किताबों की जगह हाथों में फावड़ा और लाठी; बिहार के ‘बेटों’ पर ‘खाकी’ का शिकंजा
- बड़ी कार्रवाई: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बीटेक छात्र दिव्यांशु जटराना की हत्या के मामले में फरार बिहार के सात छात्रों पर पुलिस ने इनाम की घोषणा कर दी है।
- इनाम की राशि: एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने प्रत्येक आरोपी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
- कानूनी शिकंजा: पुलिस ने कोर्ट से सातों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) हासिल कर लिया है।
- वारदात का कारण: 23 मार्च की रात प्रेमनगर के केहरी गांव में ‘यूपी बनाम बिहार’ के छात्रों के बीच वर्चस्व (Dominance) को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था।
- हत्या का हथियार: वर्चस्व की इस सनक में लाठी-डंडों के साथ-साथ फावड़े का इस्तेमाल किया गया, जिससे मुजफ्फरनगर के दिव्यांशु की मौत हो गई।
- VOB इनसाइट: बिहार के युवा जब राज्य से बाहर पढ़ने जाते हैं, तो उनके कंधों पर परिवार की उम्मीदें और बेहतर भविष्य का सपना होता है। लेकिन देहरादून की इस घटना ने एक स्याह पहलू उजागर किया है। वर्चस्व की झूठी जंग में शामिल ये सात छात्र, जो कल तक इंजीनियरिंग की डिग्रियां लेने का सपना देख रहे थे, आज पुलिस की ‘वॉन्टेड’ लिस्ट में शामिल हैं। 25 हजार का इनाम और गैर जमानती वारंट केवल इन छात्रों के लिए नहीं, बल्कि उनके उन पिताओं के लिए भी एक बड़ा झटका है जो बिहार के गांवों से खून-पसीने की कमाई भेजकर उन्हें ‘साहब’ बनाने की कोशिश कर रहे थे। ‘वर्चस्व’ की यह बीमारी शिक्षा के केंद्रों को युद्ध का मैदान बना रही है।
देहरादून/पटना | 30 मार्च, 2026
उत्तराखंड की शांत वादियों और देहरादून के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक यूआईटी (UIT) के पास बीती 23 मार्च की रात जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया है। वर्चस्व की एक ऐसी लड़ाई, जिसमें हार-जीत का फैसला किताबों से नहीं, बल्कि फावड़े और डंडों से किया गया। इस खूनी संघर्ष में एक मेधावी छात्र दिव्यांशु जटराना की जान चली गई। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी बिहार के सात छात्र अब पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए उत्तराखंड पुलिस अब बिहार के विभिन्न जिलों में छापेमारी की तैयारी कर रही है।
खूनी ‘वर्चस्व’ की दास्तान: केहरी गांव में वो काली रात
घटना की शुरुआत 23 मार्च की रात प्रेमनगर क्षेत्र के केहरी गांव में हुई। बताया जा रहा है कि हाईवे किनारे स्थित यूआईटी संस्थान में पढ़ने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों के बीच काफी समय से ‘कौन श्रेष्ठ है’ की जंग चल रही थी। यह तनाव उस रात चरम पर पहुँच गया जब दोनों गुट आमने-सामने आ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते बहस गाली-गलौज और फिर खूनी झड़प में तब्दील हो गई। हमलावरों ने पूरी तैयारी के साथ लाठी-डंडों और फावड़े से हमला किया। इस हमले में मुजफ्फरनगर (यूपी) निवासी दिव्यांशु जटराना बुरी तरह जख्मी हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में हत्या (धारा 302) के तहत मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की।
इनामी सूची: बिहार के वो ‘सात’ छात्र जो अब ‘वॉन्टेड’ हैं
एसएसपी देहरादून ने जिन सात आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है, वे सभी मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और देहरादून में रहकर पढ़ाई कर रहे थे।
नाम | मूल निवास (जिला/स्थान) | इनाम की राशि |
|---|---|---|
ऋतिक राज | पूर्वी चंपारण | 25,000 रुपये |
शांतनु कुमार | राधोपुर | 25,000 रुपये |
उज्ज्वल सिंह | नौबतपुर | 25,000 रुपये |
अंकुर | बिहार | 25,000 रुपये |
आदित्यराज | पटना | 25,000 रुपये |
विनीत राज | भोजपुर | 25,000 रुपये |
प्रहलाद राज | नवादा | 25,000 |
देहरादून पुलिस ने इन सातों के खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट (NBW) ले लिया है, जिसका मतलब है कि अब इनकी गिरफ्तारी होने पर इन्हें आसानी से जमानत नहीं मिलेगी।
पुलिसिया कार्रवाई: 4 जेल में, 11 अभी भी रडार पर
हत्याकांड के तुरंत बाद सक्रिय हुई देहरादून पुलिस ने अब तक कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस पूरी वारदात में कुल 15 आरोपियों को नामजद किया गया था, जबकि कुछ अन्य अज्ञात भी शामिल थे।
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि इन सात आरोपियों की भूमिका हत्या में सबसे अहम मानी जा रही है। ये वारदात के बाद से ही फरार हैं। पुलिस की टीमें इनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। इनाम घोषित होने के बाद अब पुलिस को उम्मीद है कि आम जनता से भी इनके बारे में सूचनाएं मिलेंगी। साथ ही, अन्य नामजद और अज्ञात आरोपियों की पहचान के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।


