
कटिहार जिले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। सदर अस्पताल में एक ही एंबुलेंस के भीतर 7 कुपोषित बच्चों और उनके 10 परिजनों सहित कुल 17 लोगों को बेहद असुरक्षित तरीके से लाए जाने का आरोप लगा है। एंबुलेंस में स्थिति इतनी खराब थी कि वहां खड़े होने या बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी।
जानकारी के अनुसार, आजमनगर प्रखंड से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत इन कुपोषित बच्चों को जांच के लिए सदर अस्पताल लाया जा रहा था। नियमों के अनुसार, एक एंबुलेंस में सीमित संख्या में मरीज और परिजनों को सुरक्षित तरीके से ले जाने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में सभी नियमों की अनदेखी की गई।
तंग और भीड़भाड़ वाली स्थिति में बच्चों और महिलाओं को सफर के दौरान भारी परेशानी और घुटन का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, कुपोषित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर होती है, ऐसे में इस तरह की परिस्थितियां उनके स्वास्थ्य के लिए और अधिक खतरनाक साबित हो सकती हैं।
जिम्मेदारी से बचते दिखे कर्मी
मामले पर सवाल उठने पर एंबुलेंस चालक साहिल और मौजूद चिकित्सक शकील अहमद ने इसे उच्च अधिकारियों के निर्देश का परिणाम बताया। उनका कहना था कि एंबुलेंस की कमी के कारण सभी बच्चों को एक साथ लाना मजबूरी थी।
चिकित्सक शकील अहमद ने कहा —
“सभी मरीज बच्चे हैं। इनमें कोई सुन नहीं सकता, कोई बोल नहीं सकता, किसी के पैर में दिक्कत है। इन्हें बेहतर जांच और इलाज के लिए लाया गया है। यह निर्णय आरबीएसके के जिला समन्वयक के निर्देश पर लिया गया।”
प्रशासन पर उठे सवाल
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रमों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ सरकार कुपोषण दूर करने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की लापरवाही व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है।
जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


