जमुई | 22 फरवरी, 2026: बिहार के जमुई जिले में फर्जी नंबर प्लेट के जरिए कानून को चकमा देने का एक बड़ा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मलयपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे डीसीएम (DCM) वाहन को जब्त किया है, जिसका नंबर तो असली था लेकिन गाड़ी पूरी तरह फर्जी। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पश्चिम बंगाल के एक शख्स के मोबाइल पर बिहार में चालान कटने का मैसेज पहुंचा।
कैसे खुला फर्जी नंबर प्लेट का राज?
इस पूरे मामले की शुरुआत पश्चिम बंगाल के आसनसोल से हुई। वहाँ के निवासी नीरज कुमार मंडल तब दंग रह गए जब उनके मोबाइल पर जमुई (बिहार) में दो बार ट्रैफिक चालान कटने का मैसेज आया।
- हैरानी की वजह: नीरज का वाहन (नंबर: BR 37E/2056) कभी जमुई गया ही नहीं था, वह आसनसोल में ही खड़ा था।
- निजी जांच: नीरज ने जमुई के बरहट थाना क्षेत्र स्थित अपने ननिहाल (टेंगहारा गांव) में संपर्क किया। वहाँ छानबीन करने पर पता चला कि उनके वाहन के नंबर का उपयोग हूबहू एक दूसरे डीसीएम वाहन पर किया जा रहा है, जो स्थानीय स्तर पर गुड्डू कुमार नामक व्यक्ति का है।
पुलिस की छापेमारी: सीमेंट लदा वाहन बरामद
सूचना मिलते ही मलयपुर पुलिस हरकत में आई। प्रभारी थानाध्यक्ष अर्चना कुमारी और एसआई सुनील कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी कर सीमेंट लदे उस डीसीएम वाहन को जब्त कर लिया जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी।
- सुरक्षा उपाय: मामला संदिग्ध होने के कारण वाहन पर लदे सीमेंट को दूसरे वाहन पर लोड कर गंतव्य तक भेजा गया ताकि माल खराब न हो।
- एफआईआर दर्ज: आसनसोल से असली मालिक के जमुई पहुँचने के बाद, फर्जी नंबर प्लेट लगाकर पुलिस और जनता को गुमराह करने के आरोप में वाहन मालिक गुड्डू कुमार और चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
आखिर क्यों रचा गया यह ‘नंबर गेम’?
पुलिस सूत्रों और प्रारंभिक जांच में इस फर्जीवाड़े के पीछे की एक बड़ी वजह सामने आई है:
- कर्ज से बचने की कोशिश: आशंका जताई जा रही है कि जब्त वाहन पर बैंक या फाइनेंस कंपनी का भारी लोन बकाया था।
- पहचान छुपाना: लोन रिकवरी एजेंटों और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए मालिक ने वाहन की असली पहचान छुपाने के उद्देश्य से दूसरे राज्य की गाड़ी का नंबर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
- लोकल रैक का काम: यह वाहन सीमेंट रैक पर माल ढोने का काम करता था, जिससे इसकी आवाजाही सीमित क्षेत्रों में रहती थी।
पुलिस का बयान
मलयपुर थानाध्यक्ष शेखर सौरभ ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन चलाने के आरोप में डीसीएम को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस तरह के फर्जीवाड़े में कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है या इस वाहन का उपयोग किसी अन्य अवैध गतिविधि में भी किया गया है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


