पटना में सनसनीखेज वारदात: सीढ़ियों के अंधेरे में मौत का इंतजार कर रहे थे शूटर, पीछे से आवाज दी और कारोबारी के मुड़ते ही झोंक दी गोलियां; सीसीटीवी में कैद हुआ 125 सेकंड का ‘खौफनाक मंजर’

  • ​राजधानी पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र स्थित शिवपुरी में मंगलवार की रात एक बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम दिया गया, जहां अपराधियों ने कंस्ट्रक्शन मटेरियल के कारोबारी दिलीप कुमार सिंह को अपना निशाना बनाया।
  • ​शिवपुरी के जीएस इंक्लेव अपार्टमेंट में पहले से घात लगाकर बैठे दो शूटरों ने कारोबारी पर एक-दो नहीं, बल्कि पूरे पांच राउंड फायरिंग की, जिसका उद्देश्य उनकी जान लेना था।
  • ​वारदात का रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें अपराधी कारोबारी का पीछा करते और उन पर गोलियां दागते साफ नजर आ रहे हैं।
  • ​हमले में दिलीप कुमार सिंह के पेट में एक गोली लगी है, जो शरीर के आर-पार हो गई, लेकिन किस्मत अच्छी थी कि बाकी चार गोलियां निशाने से चूक गईं।
  • ​पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि अपराधियों ने कारोबारी का उनके कार्यालय से ही पीछा किया था और कोई ‘लाइनर’ पल-पल की जानकारी शूटरों तक पहुंचा रहा था।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

शिवपुरी के जीएस इंक्लेव में आधी रात का ‘खूनी’ ड्रामा

पटना की कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए अपराधियों ने एक बार फिर रिहायशी इलाके में घुसकर खूनी खेल खेला है। मंगलवार की देर रात जब शास्त्रीनगर का शिवपुरी इलाका सोने की तैयारी कर रहा था, तब जीएस इंक्लेव अपार्टमेंट की सीढ़ियों के पास मौत अपना जाल बिछाए बैठी थी। कंस्ट्रक्शन मटेरियल के बड़े व्यवसायी दिलीप कुमार सिंह अपने काम से लौटकर जैसे ही अपार्टमेंट में दाखिल हुए, उन्हें इस बात का रत्ती भर भी अहसास नहीं था कि साये की तरह कुछ लोग उनके पीछे लगे हैं। यह हमला केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि अपराधियों के उस दुस्साहस का प्रमाण है जहां वे सुरक्षित माने जाने वाले अपार्टमेंट्स के भीतर घुसकर शिकार का इंतजार करने से भी नहीं हिचक रहे हैं।

शूटरों की सोची-समझी चाल: “नाम लेकर पुकारा और फिर चला दी गोली”

पुलिस को दिए गए बयान और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से यह साफ होता है कि यह हमला पूरी तरह से ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ या पूर्व नियोजित रंजिश का हिस्सा था। अपराधी जानते थे कि दिलीप कुमार सिंह कब और कैसे अपार्टमेंट में दाखिल होते हैं। अपराधियों ने अपार्टमेंट की सीढ़ियों के पास अंधेरे का फायदा उठाते हुए खुद को छिपा रखा था। जैसे ही दिलीप अपनी कार पार्क करके लिफ्ट की ओर बढ़ने लगे, शूटरों ने उन्हें पीछे से आवाज दी। यह अपराधियों की एक पुरानी तकनीक है ताकि शिकार मुड़कर देखे और उसका चेहरा व छाती हमलावर के सामने हो। जैसे ही दिलीप मुड़े, शूटरों ने बिना एक सेकंड गंवाए पिस्टल से गोलियां दागनी शुरू कर दीं। पहली गोली सीधे उनके पेट में लगी और आर-पार हो गई।

सांसों की जद्दोजहद: घायल होने के बाद भी मौत को दी मात

पेट में गोली लगने के बाद दिलीप कुमार सिंह गिरे नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए लॉबी की ओर भागे। सीसीटीवी फुटेज के 2 मिनट 5 सेकंड के वीडियो में साफ दिख रहा है कि घायल होने के बावजूद दिलीप ने हार नहीं मानी। शूटरों ने भागते हुए कारोबारी पर चार और गोलियां चलाईं। अपार्टमेंट की दीवारों पर गोलियों के निशान उस दहशत की गवाही दे रहे हैं जो उस रात वहां मची थी। गनीमत यह रही कि भागते समय अपराधियों का निशाना चूक गया और बाकी चार गोलियां दिलीप को नहीं लगीं। अपराधियों ने लॉबी तक उनका पीछा किया, लेकिन जब उन्हें लगा कि शोर मच सकता है और लोग जुट सकते हैं, तो वे वहां से भाग निकले।

सीसीटीवी में कैद हुआ हमलावरों का हुलिया: ‘हेल्मेट’ बना पहचान छिपाने का ढाल

वारदात के बाद पुलिस ने जब जीएस इंक्लेव अपार्टमेंट के कैमरों की जांच की, तो अपराधियों की पूरी गतिविधि रिकॉर्ड मिली। फुटेज में दो बदमाश नजर आ रहे हैं। एक अपराधी ने काली शर्ट और काली पैंट पहन रखी थी और अपनी पहचान छिपाने के लिए सिर पर हेल्मेट लगा रखा था। हेल्मेट पहनकर वारदात को अंजाम देना यह दर्शाता है कि अपराधियों को पता था कि वहां कैमरे लगे हैं। वे प्रोफेशनल अपराधी लग रहे थे जो पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहे होंगे। पुलिस अब उस फुटेज के आधार पर हुलिए का मिलान पुराने अपराधियों के रिकॉर्ड से कर रही है।

बोरिंग रोड से शिवपुरी तक की ‘रेकी’: ऑफिस से ही लगा था ‘लाइनर’

सचिवालय डीएसपी-2 साकेत ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी की ओर इशारा किया है। पुलिस को संदेह है कि दिलीप कुमार सिंह का पीछा उनके बोरिंग रोड स्थित कार्यालय से ही किया जा रहा था। अपराधियों को पता था कि वे कब ऑफिस से निकलेंगे। पुलिस ने बुधवार को बोरिंग रोड चौराहा से लेकर शिवपुरी तक के मार्ग में पड़ने वाले एक दर्जन से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या कोई खास बाइक या कार दिलीप की गाड़ी का लगातार पीछा कर रही थी। आशंका है कि कोई ‘लाइनर’ (सूचना देने वाला) कारोबारी के साथ-साथ चल रहा था और मोबाइल के जरिए अपार्टमेंट में छिपे शूटरों को सिग्नल दे रहा था कि “शिकार पहुंच गया है।”

रुपयों का लेन-देन या पुरानी अदावत? जांच के केंद्र में विवाद

शास्त्रीनगर पुलिस अब इस कातिलाना हमले के पीछे के असल मकसद को तलाशने में जुटी है। दिलीप कुमार सिंह का कंस्ट्रक्शन मटेरियल का बड़ा कारोबार है, जिसमें अक्सर लेन-देन को लेकर विवाद की संभावनाएं रहती हैं। पुलिस उनकी व्यापारिक डील्स, पुराने पार्टनर्स और हाल के दिनों में हुए किसी बड़े विवाद की बारीकी से जांच कर रही है। इसके अलावा, उनके निजी जीवन और पूर्व के किसी दुश्मनी वाले एंगल को भी नकारा नहीं जा रहा है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या उन्हें हाल के दिनों में रंगदारी के लिए कोई धमकी भरा फोन आया था।

अपार्टमेंट्स की सुरक्षा पर उठे सवाल: क्या सीसीटीवी ही काफी है?

शिवपुरी की इस घटना ने पटना के अपार्टमेंट्स में रहने वाले हजारों परिवारों के मन में सुरक्षा को लेकर डर पैदा कर दिया है। जीएस इंक्लेव जैसे प्रतिष्ठित अपार्टमेंट में अगर अपराधी सीढ़ियों के पास छिपकर बैठ सकते हैं, तो गार्ड्स और सुरक्षा तंत्र की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अपार्टमेंट के गेट पर आने-जाने वालों की सघन चेकिंग नहीं होती, जिसका फायदा उठाकर बाहरी लोग आसानी से भीतर प्रवेश कर जाते हैं। इस हमले के बाद अपार्टमेंट की सुरक्षा समिति ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने का निर्णय लिया है।

पुलिसिया कार्रवाई: अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज, छापेमारी जारी

शास्त्रीनगर पुलिस ने दिलीप कुमार सिंह के बयान पर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की कई टीमें अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। डीएसपी साकेत ने भरोसा दिलाया है कि अपराधियों की पहचान लगभग की जा चुकी है और वे जल्द ही कानून के शिकंजे में होंगे। पुलिस उन मोबाइल नंबर्स की भी कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाल रही है जो उस समय शिवपुरी टावर लोकेशन में एक्टिव थे।

राजधानी में व्यवसायी सुरक्षित नहीं?

दिलीप कुमार सिंह पर हुआ यह हमला पटना के व्यवसायियों के लिए एक चेतावनी है। अपराधियों ने जिस तरह से अपार्टमेंट के भीतर घुसकर ‘टारगेटेड’ हमला किया है, उसने पुलिस की गश्त और इंटेलिजेंस की पोल खोल दी है। फिलहाल, दिलीप कुमार सिंह अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि क्या पटना पुलिस उन शूटरों तक पहुंच पाएगी जिन्होंने शहर के बीचों-बीच पांच गोलियां चलाकर प्रशासन को चुनौती दी है? द वॉयस ऑफ बिहार की टीम घायल कारोबारी के जल्द स्वस्थ होने की कामना करती है और इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुँचाती रहेगी।

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