नवहट्टा (सहरसा) | 01 मार्च, 2026: बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। नवहट्टा प्रखंड के पिपरही गांव की पांच किशोरियां, जो शुक्रवार दोपहर मवेशियों के लिए चारा लाने बहियार (खेतों) की ओर गई थीं, रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई हैं। लापता लड़कियों में दो सगी बहनें भी शामिल हैं। घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिलने से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और पूरा इलाका किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से डरा हुआ है।
दोपहर 1 बजे निकली थीं, फिर कभी नहीं लौटीं
जानकारी के अनुसार, सभी पांचों लड़कियां महादलित परिवार से हैं और उनकी उम्र 12 से 16 वर्ष के बीच है। ये लड़कियां हर रोज की तरह शुक्रवार दोपहर करीब 1:00 बजे एक साथ घास काटने के लिए बहियार की ओर निकली थीं। शाम 5 बजे तक जब वे वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की, लेकिन खेतों में केवल सन्नाटा मिला।
लापता लड़कियों की पहचान:
- स्वीकृति कुमारी (12): पिता भूपेन्द्र सदा।
- सोनाली कुमारी (12): पिता धर्मेंद्र सदा।
- नेहा कुमारी (13) और राधा कुमारी (16): दोनों सगी बहनें, पिता प्रेम सदा। (बड़ी बहन राधा की शादी एक साल पहले सुपौल के बलहा गांव में हुई थी)।
- कोमल कुमारी (13): पिता दिनेश सदा।
पुलिस की छापेमारी जारी, पर हाथ अब भी खाली
शनिवार को थक-हारकर परिजनों ने नवहट्टा थाने में मामले की जानकारी दी। थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं जो संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस आसपास के गांवों और रास्तों पर नजर रख रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि लड़कियां रोज चारा लेकर समय पर लौट आती थीं, उनका इस तरह एक साथ गायब हो जाना सामान्य नहीं लग रहा। ग्रामीणों को डर है कि कहीं किसी संगठित गिरोह ने उन्हें अपना शिकार तो नहीं बना लिया।
VOB का नजरिया: सुरक्षित नहीं हैं हमारे खेतों की पगडंडियां?
एक साथ पांच किशोरियों का गायब हो जाना केवल एक पुलिसिया मामला नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर एक बड़ा तमाचा है। सहरसा के ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। जब बेटियां अपने गांव के बहियार (खेतों) में भी सुरक्षित नहीं हैं, तो ‘महिला सशक्तिकरण’ के दावे खोखले नजर आते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ जिला प्रशासन से मांग करता है कि इस मामले को ‘हाई प्रायोरिटी’ पर रखकर स्पेशल टीम बनाई जाए और बेटियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


