घर की बदहाल स्थिति देख 10वीं के बाद छोड़ी थी पढ़ाई, आज मूर्तिकार बन अपने भाई-बहनों को दिला रहीं शिक्षा

स्कूल जाने की उम्र में थामा पेंट ब्रश: आज आपको एक ऐसी युवा लड़की की कहानी बताएंगे, जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है. हाथ में पेंट ब्रश थामे इस लड़की का नाम पूजा है. जो काफी कम उम्र से ही मूर्तिकार बनी है. पूजा ने मैट्रिक तक की पढ़ाई की है, इसके बाद उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी. उसके पीछे का कारण छोटे-भाई बहन की पढ़ाई थी, जो उसके पिता की कमाई से नहीं हो पा रही थी. पिता की कमाई से किसी तरह परिवार चल पा रहा रहा था.

पूजा करा रही है भाई-बहनों की पढ़ाई: पूजा ने बताया कि उसे लगा कि उसके सभी भाई-बहन घर की दयनीय स्थिति की वजह से पढ़ाई नहीं कर पाएंगे. अगर वह पिता का साथ देगी तो हो सकता है उनके द्वारा बनाई गई मूर्ति की संख्या बढ़ेगी और पैसे भी अच्छे आएंगे. आज पूजा अपने पिता का साथ देकर दो बहन और दो भाई की पढ़ाई अच्छे स्कूल में करवा रही है. वहीं उनके घर की स्थिति भी बदली है.

“हमारे घर स्थिति अच्छी नहीं थी. पैसों की तंग्गी की वजह से मैंने दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी. मैं अपने पिता के साथ मूर्तिया बनाने लगी. आज मूर्ति बेचकर अच्छी कमाई हो जाती है. जिससे मैं अपने भाई-बहनों की अच्छे से पढ़ाई करवा पा रही हूं.”पूजा, मूर्तिकार

क्या कहती है पूजा की छोटी बहन: पूजा की छोटी बहन बताती है कि जब उन लोगों ने होस संभाला तो देखा कि उनके पिता और बहन मूर्ति बनाने का काम करते हैं. मूर्ति बेचकर उन पैसों से उनका परिवार चलता है, साथ ही साथ हम उन लोगों की पढ़ाई का खर्च भी निकालता है. घर की स्थिति पहले काफी खराब थी, जिसे देखकर उन लोगों को लगता था कि वो कभी स्कूल नहीं जा पाएंगे लेकिन उनकी बहन और पिता की मेहनत से आज वो शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

“मेरी बहन और पिता के मेहनत से कमाए रुपयों की वजह से हम सभी-भाई बहन अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं. घर की स्थिति भी पहले से काफी अच्छी हो गई है. आज हमारी दीदी माता-पिता के रूप में खड़ी है.”पूजा की बहन

परिवार की हालात देख पिता के साथ बनाई मूर्ति: पूजा के पिता बताते हैं कि वो अकेले पहले काफी कम मूर्तियां बनाया करते थे. जिससे किसी तरह परिवार का पालन पोषण होता था. इतनी भी कमाई नहीं हो पाती थी कि उनकी तीन बेटियां और दो बेटे की पढ़ाई वो करवा सके. हालांकि पूजा ने परिवार की गरीबी को देखते हुए पढ़ाई छोड़ पिता के साथ काम करना शुरू कर दिया. आज उन दोनों के द्वारा बनाई गई मूर्ति की संख्या भी काफी है और ये मूर्तियां अच्छे कीमत में बिक भी जाती है.

“धीरे-धीरे घर की स्थिति भी बदल गई है. पूजा ने मैट्रिक तक की ही पढ़ाई की लेकिन दो बहन और दो भाई की पढ़ाई करवा रही है. हमें अपनी बेटी पर गर्व है. वो बेटा बनकर हमारे साथ खड़ी है.”पूजा के पिता

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