
बिहार की सियासत में विकास कार्यों की रफ्तार और गुणवत्ता को लेकर बड़ा संदेश दिया गया। भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि की अध्यक्षता में अधिवेशन भवन, पटना में राजस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में 19 विभागों की निर्माणाधीन परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई और स्पष्ट निर्देश दिए गए कि काम में सुस्ती या गुणवत्ता से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं होगा।
निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा संचालित गृह (कारा), अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास और सामान्य प्रशासन सहित कई विभागों की परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति पर गहन मंथन हुआ। सचिव ने अभियंताओं को निर्देश दिया कि सरकारी भवनों का अनुश्रवण और रखरखाव मुकम्मल रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि सुरक्षा और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
प्रमुख निर्माण कार्यों को प्राथमिकता
- मंडल कारा में चल रहे निर्माण कार्यों को तेज गति देने और हैंडओवर प्रक्रिया समय पर पूरी करने पर जोर दिया गया।
- अटल कला भवनों (प्रत्येक की क्षमता 620) को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश।
- खेल संरचनाओं, मुख्य सचिवालय और विकास भवन में अग्निशमन कार्यों को प्राथमिकता देने की चेतावनी।
पंचायत स्तर पर विकास की स्थिति
बैठक में पंचायत स्तर की परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई:
- 2615 पंचायत सरकार भवनों में से 450 से अधिक पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 300 अंतिम चरण में हैं। अगले 2-3 महीनों में 1000 भवनों को पूरा करने का लक्ष्य तय।
- 240 प्रखंडों में प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय निर्माणाधीन हैं।
- 59 प्रखंडों में आवासीय परिसर निर्माणाधीन, और 200 से अधिक भवनों का कार्य शुरू हो चुका है।
गुणवत्ता पर सख्त चेतावनी
सचिव कुमार रवि ने दो टूक कहा कि गुणवत्ता में कमी पाई गई तो कठोर कार्रवाई होगी। अभियंताओं को निर्देश दिए गए:
- साप्ताहिक स्थल निरीक्षण करना।
- संवेदकों के साथ नियमित समीक्षा करना।
- निर्माण सामग्री को मानक के अनुरूप सुनिश्चित करना।
- ऑनलाइन पीआईएमएस पोर्टल को अपडेट रखना, ताकि उच्च स्तर से निगरानी संभव हो।
सरकार विकास के एजेंडे पर ‘नो-कॉम्प्रोमाइज’ मोड में है। अब सवाल यह है कि ये कड़े निर्देश जमीनी स्तर पर कितने असरदार साबित होंगे।


