सतुआ बाबा: आध्यात्म से ऐश्वर्य तक, लग्जरी लाइफस्टाइल बनी चर्चा का विषय

प्रयागराज/वाराणसी। इन दिनों माघ मेले और महाकुंभ से जुड़ी चर्चाओं के बीच सतुआ बाबा का नाम सुर्खियों में है। उनकी आध्यात्मिक पहचान के साथ-साथ लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। महंगी गाड़ियां, ब्रांडेड चश्मे और भव्य आश्रम को लेकर लोग दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के ललितपुर से संत बनने तक का सफर

सतुआ बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में हुआ था। उनका शुरुआती नाम संतोष तिवारी था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वे शोभाराम तिवारी और राजा बेटी तिवारी के चार बच्चों में सबसे छोटे हैं।
करीब 11 साल की उम्र में उन्होंने घर-परिवार छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। पढ़ाई में मन न लगने के बाद उनके बड़े भाई महेश तिवारी उन्हें वाराणसी के मणिकर्णिका घाट ले गए, जहां उन्होंने विष्णु स्वामी संप्रदाय (सतुआ आश्रम) में प्रवेश लिया।

यहां वे यमुनाचार्य महाराज के मार्गदर्शन में धार्मिक अध्ययन में लीन हो गए और जल्द ही संप्रदाय के प्रिय शिष्य बन गए।

2011 के बाद संभाली संप्रदाय की कमान

खबरों के अनुसार, 2005 में उन्होंने पूरी तरह सांसारिक जीवन त्यागकर सन्यास ले लिया था।
2011 में यमुनाचार्य महाराज के निधन के बाद संतोष दास ने विष्णु स्वामी संप्रदाय का नेतृत्व संभाला।
2012 में उन्हें संप्रदाय का 57वां आचार्य घोषित किया गया और तभी उन्हें ‘सतुआ बाबा’ की उपाधि मिली।

राजनीतिक और धार्मिक मंचों पर बढ़ी मौजूदगी

हाल के वर्षों में सतुआ बाबा की मौजूदगी धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों में भी बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सनातन धर्म और आध्यात्मिक एकता को लेकर सतुआ बाबा की भूमिका की सराहना की है।
महाकुंभ 2025 में उन्हें जगद्गुरु की उपाधि मिलने की बात भी सामने आई है। इसके साथ ही उन्हें काशी विश्वनाथ का प्रतिनिधि बताया जाता है।

महंगी गाड़ियां बनीं चर्चा का केंद्र

सतुआ बाबा की चर्चा तब और तेज हो गई जब सोशल मीडिया पर उनकी पोर्श 911 टर्बो (करीब 4.4 करोड़ रुपये) और लैंड रोवर डिफेंडर (करीब 3 करोड़ रुपये) की तस्वीरें वायरल हुईं।
इसके अलावा उनके ब्रांडेड चश्मे, भगवा वस्त्र और काफिले को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए।

कितनी है संपत्ति?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सतुआ बाबा की कुल संपत्ति का कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है।
हालांकि,

  • केवल कारों का कलेक्शन लगभग 10 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है
  • अनुमान के मुताबिक संप्रदाय, जमीन और अन्य संपत्तियों को मिलाकर उनकी नेटवर्थ 15 से 30 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो सकती है

बनारस आश्रम की कीमत 50 करोड़ के करीब

सूत्रों के अनुसार, सतुआ पीठ के पास उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में संपत्तियां हैं।
केवल वाराणसी स्थित आश्रम की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
हालांकि, सतुआ बाबा का कहना है कि ये सभी संपत्तियां धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाई जाती हैं, न कि निजी विलासिता के लिए।

समर्थन और विरोध—दोनों खेमे

सोशल मीडिया पर एक वर्ग उनकी जीवनशैली की आलोचना कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे संप्रदाय की संपत्ति और आधुनिक समय की आवश्यकता बता रहा है।
फिलहाल, माघ मेले और महाकुंभ के चलते सतुआ बाबा लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं


 

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