संतोष सुमन का इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया मंजूर, इस्तीफे के बाद सियासत हुई तेज

जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन के नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद सियासत तेज हो गई है। संतोष सुमन के इस्तीफे को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंजूर कर लिया है। इस्तीफे के बाद संतोष मांझी ने कहा था कि नीतीश कुमार हम का जेडीयू में विलय करने का दबाव बना रहे थे। जबकि जेडीयू का कहना है कि मांझी जैसे लोग आते-जाते रहते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। संतोष सुमन के इस्तीफा पर बीजेपी ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने अहंकार में किसी का सम्मान नहीं करते हैं।

नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा देने का बाद जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने बड़ा खुलासा किया है। संतोष सुमन ने कहा है कि नीतीश कुमार हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा का विलय जेडीयू में कराना चाह रहे थे। जेडीयू की तरफ से लगातार इसके लिए जबाव बनाया जा रहा था। बार बार कहा जा रहा था कि अपनी पार्टी का विलय जेडीयू में कल लीजिए। पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए हमने फैसला लिया और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन कहा कि मैने रिजाइन कर दिया है। मुख्यमंत्री से अपील की है की वे मेरे इस्तीफे को मंजूर कर लें। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी को मर्ज करने की बात कही गई थी, जिसे हमलोग ने स्वीकार नहीं किया। हम महागठबंधन से अलग नहीं हुए हैं, जब तक नीतीश जी रखेंगे तब तक रहेंगे। हमारे पास जो प्रस्ताव आया उसे हमने मंजूर नहीं किया। जेडीयू की तरफ से विलय करने के लिए दवाब था हमारे ऊपर लेकिन हम पार्टी का अस्तित्व खत्म नहीं कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का अस्तित्व खत्म करने की बात हो रही थी लेकिन हमलोग इतने दिनो से बस रहे थे। 23 जून को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में भी हमारी पार्टी को किसी ने नहीं बुलाया। इस्तीफा देने से पहले नीतीश कुमार से भी बात हुई थी। हम अलग होकर भी महागठबंधन में रहना चाहते है लेकिन ये उनके ऊपर है कि वो हमे रखना चाहते हैं या नहीं। अब संघर्ष के रास्ते पर जनता के बीच जाएंगे।

संतोष सुमन ने कहा कि पार्टी के कोर वर्कर, विधायकों से बात करके हमने ये फैसला लिया है। शेर का नाम नहीं लेंगे लेकिन हमारी छोटी पार्टी शेर के जबड़े में जाने से बच गई। हमारी पार्टी 5 सीटों के लिए बिल्कुल तैयार है, अगर 1- 2 सीट कम भी होता तो हम विचार कर सकते थे लेकिन अब सुलह की कोई बात नहीं होनी है। जनहित के मुद्दों के लिए राज्यपाल और गृह मंत्री से मिलना कोई गुनाह नहीं है।

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