सहरसा के शख्स का देहरादून में ‘खौफनाक’ कांड! पहली पत्नी को मारकर 4 दिन रजाई में छिपाया; फिर कट्टे में भरकर जंगल में फेंका

HIGHLIGHTS: प्रेम त्रिकोण में ‘मर्डर’ का खौफनाक अंत; रजाई और कट्टे के बीच छिपी थी बेवफाई की दास्तां

  • ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री सुलझी: सहरसा (बिहार) निवासी रंजीत शर्मा को देहरादून पुलिस ने पहली पत्नी रूपा की हत्या के आरोप में दबोचा।
  • 4 दिन तक शव के साथ: हत्या के बाद रंजीत ने 4 दिनों तक पत्नी की लाश को रजाई में लपेटकर घर में ही छिपाए रखा।
  • वजह ‘सौतन’: दूसरी पत्नी को छोड़ने का दबाव और फोन छीनने पर हुए विवाद में रंजीत ने रूपा का गला घोंट दिया।
  • जंगल में ठिकाना: दूसरी पत्नी के आने पर पकड़े जाने के डर से शव को बाइक पर लादकर मांडूवाला के जंगल में फेंक दिया।

देहरादून/सहरसा | 20 मार्च, 2026

​उत्तराखंड की वादियों में सहरसा के एक मजदूर ने ऐसी खौफनाक वारदात को अंजाम दिया, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। देहरादून के मांडूवाला जंगल में 11 मार्च को एक कट्टे में मिली सड़ी-गली लाश की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस जब सहरसा निवासी रंजीत शर्मा तक पहुंची, तो एक ऐसी कहानी सामने आई जिसमें प्यार, बेवफाई और सनक का मेल था।

शादी, फरारी और फिर ‘मौत’ का रिटर्न टिकट

​पुलिस की पूछताछ में आरोपी रंजीत ने अपनी जिंदगी के पेचीदा पन्ने खोले:

  1. पहली शादी (2009): रंजीत की शादी रूपा से हुई थी, लेकिन 4 साल पहले रूपा उसे छोड़कर किसी और के साथ चली गई।
  2. दूसरी शादी: रूपा के जाने के बाद रंजीत ने सुशीला से शादी कर ली और देहरादून में मजदूरी करने लगा।
  3. रूपा की वापसी: करीब एक महीने पहले रूपा अचानक अपनी 11 महीने की बच्ची के साथ रंजीत के पास लौट आई और साथ रहने की जिद करने लगी।

5 मार्च की वो ‘खूनी’ रात: फोन बना जान का दुश्मन

​रंजीत ने बताया कि रूपा लगातार उस पर दूसरी पत्नी (सुशीला) को छोड़ने का दबाव बना रही थी। 5 मार्च की रात जब रंजीत फोन पर अपनी दूसरी पत्नी से बात कर रहा था, तो रूपा ने गुस्से में फोन छीन लिया। इसी बात पर रंजीत का आपा खो गया और उसने गला घोंटकर रूपा को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।

शव का ‘डिस्पोजल’ और पुलिस की चौकसी

​हत्या के बाद रंजीत ने शव को रजाई में लपेटकर कमरे के कोने में डाल दिया। 4 दिन बाद जब उसकी दूसरी पत्नी सुशीला वहां आने वाली थी, तब उसने आनन-फानन में शव को प्लास्टिक के कट्टे में भरा और अपनी बाइक से ले जाकर जंगल में फेंक दिया। 11 मार्च को पुलिस ने शव बरामद किया, और चेहरे की शिनाख्त न होने के बावजूद वैज्ञानिक जांच और मुखबिरों की मदद से रंजीत को भाटोवाला से गिरफ्तार कर लिया।

VOB का नजरिया: क्या ‘रिश्तों का बोझ’ अपराध का लाइसेंस है?

​सहरसा से देहरादून तक फैली यह मर्डर मिस्ट्री मानवीय रिश्तों के उलझाव का सबसे डरावना चेहरा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि रंजीत शर्मा ने जो किया वह किसी भी तर्क से जायज नहीं ठहराया जा सकता। अगर रूपा उसे छोड़कर गई थी और फिर लौटी, तो इसका समाधान कानून या समाज के पास था, न कि रजाई में छिपी 4 दिन की लाश में।

​हैरानी की बात यह है कि एक मासूम 11 महीने की बच्ची, जिसे शायद पता भी नहीं कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है और उसका पिता जेल की सलाखों के पीछे है, उसका भविष्य अब अंधकारमय है। पुलिस ने एक ‘ब्लाइंड मर्डर’ को सुलझाकर बेहतरीन काम किया है, लेकिन समाज को यह सोचना होगा कि गुस्से के चंद मिनट कैसे दो परिवारों को तबाह कर देते हैं।

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