HIGHLIGHTS
- सनसनीखेज खुलासा: महज 36 घंटे में पुलिस ने सुलझाई मर्डर मिस्ट्री; 2 शूटरों समेत 5 अपराधी गिरफ्तार।
- प्रतिशोध की आग: करण टाइगर की हत्या का बदला लेने के लिए गिरोह ने 5 साल तक बुना था साजिश का जाल।
- शादी का इंतजार: शूटरों ने करण की बहन की शादी (27 फरवरी) संपन्न होने तक रोके रखा हमला; 13 मार्च को कर दी हत्या।
- घर का भेदी: छोटू का रिश्तेदार सौरव मिश्रा ही निकला गद्दार; उसी के घर से मिलीं 6 पिस्टल, कट्टा और रिवाल्वर।
सहरसा | 16 मार्च, 2026
सहरसा पुलिस ने जिले के चर्चित छोटू मिश्रा हत्याकांड का खुलासा करते हुए यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे जितना भी शातिर हो, कानून के हाथों से बच नहीं सकता। एसपी हिमांशु के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने 36 घंटे के भीतर न केवल हत्यारों को दबोच लिया, बल्कि उस ‘खूनी पटकथा’ का भी पर्दाफाश कर दिया जिसे लिखने के लिए अपराधियों ने पांच साल तक पल-पल का इंतजार किया था।
5 साल का इंतकाम और 13 दिन का गैप
यह हत्याकांड किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। पुलिस के अनुसार, यह पूरी वारदात मिहिर त्रिवेदी उर्फ करण टाइगर की हत्या का प्रतिशोध है। छोटू मिश्रा, करण टाइगर की हत्या का मुख्य आरोपी था और 4 साल जेल में रहने के बाद हाल ही में बाहर आया था।
- साजिश: करण के गिरोह ने उसकी मौत का बदला लेने के लिए छोटू के जेल से बाहर आने का इंतजार किया।
- इमोशनल ट्विस्ट: गिरोह ने कसम खाई थी कि हमला तभी होगा जब करण की बहन की विदाई हो जाएगी। 27 फरवरी को शादी संपन्न हुई और उसके ठीक 14वें दिन यानी 13 मार्च की रात छोटू को गोलियों से भून दिया गया।
शूटरों की गिरफ्तारी और हथियारों का ‘जखीरा’
पुलिस ने छापेमारी कर दो मुख्य शूटरों को अलग-अलग जिलों से दबोचा:
- रोहित कुमार उर्फ मिट्टू (हटियागाछी): इसे सुपौल से गिरफ्तार किया गया।
- नवनीत उर्फ उदय (रसलपुर): इसे विद्यापति नगर से पकड़ा गया।
इनके अलावा अभिनव कुमार, राजा तिवारी और सौरव मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि सौरव मिश्रा, मृतक छोटू का अपना रिश्तेदार है। सौरव के घर से ही वह बैग बरामद हुआ जिसमें 6 पिस्टल, एक कट्टा और एक रिवाल्वर छिपाकर रखे गए थे। हत्या के बाद शूटरों ने हथियार वहीं सुरक्षित रख दिए थे।
फंडिंग का आरोप: गोलू यादव अब भी रडार पर
परिजनों ने पहले ही आरोप लगाया था कि इस पूरी हत्या के पीछे गोलू यादव का हाथ है और उसने ही शूटरों को ‘फंडिंग’ मुहैया कराई थी। एसपी हिमांशु ने बताया कि पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है और फंडिंग के दावों की भी गहराई से तफ्तीश की जा रही है।
VOB का नजरिया: ‘क्राइम-रिटर्न’ और रिश्तों का कत्ल!
सहरसा में छोटू मिश्रा की हत्या यह बताती है कि दियारा और शहरी इलाकों में ‘बदले की राजनीति’ अभी भी कितनी हावी है। 5 साल तक एक हत्या का इंतजार करना अपराधियों की ठंडी और क्रूर मानसिकता को दर्शाता है। सबसे दुखद पहलू यह है कि एक रिश्तेदार (सौरव मिश्रा) ही अपराधियों का मददगार निकला। यह समाज के लिए चेतावनी है कि ‘घर का भेदी’ ही अक्सर जानलेवा साबित होता है। पुलिस की 36 घंटे वाली फुर्ती काबिले तारीफ है, लेकिन असली चुनौती अब इन गैंग्स के ‘फंडिंग नेटवर्क’ को ध्वस्त करने की है।


