पटना | 28 फरवरी, 2026: बिहार के गांवों की गलियां अब सूरज ढलने के बाद भी अंधेरे में नहीं डूबी रहेंगी। मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ कर दिया कि अब केवल लाइट लगाना काफी नहीं है, उनका जलते रहना और उनकी निगरानी करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
9.66 लाख का आंकड़ा पार: हर गांव होगा रोशन
समीक्षा बैठक के दौरान यह सुखद जानकारी सामने आई कि राज्य की ग्राम पंचायतों में अब तक कुल 9,66,051 सोलर स्ट्रीट लाइट्स लगाई जा चुकी हैं।
बैठक के 3 सबसे बड़े ‘कड़े’ फैसले:
- 72 घंटे की डेडलाइन: अगर कोई सोलर लाइट खराब होती है और 72 घंटे के भीतर ठीक नहीं की गई, तो संबंधित एजेंसी पर अनुबंध के अनुसार भारी जुर्माना (Fine) लगाया जाएगा।
- CMS से जुड़ाव अनिवार्य: ब्रेडा (BREDA) द्वारा विकसित ‘केंद्रीकृत अनुश्रवण प्रणाली’ (Centralized Monitoring System – CMS) पर सभी लाइट्स को जोड़ना अब अनिवार्य है। जो एजेंसियां इसमें देरी करेंगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- वेयरहाउस निरीक्षण: जिला पंचायत राज पदाधिकारियों (DPROs) को निर्देश दिया गया है कि वे केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर जाकर एजेंसियों के गोदामों का मुआयना करें।
तकनीकी खामियों का ‘परमानेंट’ इलाज
अक्सर सोलर लाइट्स में ‘सिग्नल लॉस’ या ‘फॉल्टी लाइट’ की समस्या आती है। इसके स्थायी समाधान के लिए विभाग ने सख्त रुख अपनाया है:
- आपसी तालमेल: CMS विकसित करने वाली एजेंसी Amnex Infotechnologies और लाइट लगाने वाली अन्य एजेंसियों को अब साथ मिलकर काम करना होगा।
- मोबाइल ऐप से निगरानी: पंचायत सचिवों को अब हर सप्ताह मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से अपने क्षेत्र की लाइट्स की समीक्षा करनी होगी। यह रिपोर्ट सीधे जिला मुख्यालय और पटना तक पहुंचेगी।
प्रशासनिक अमले की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह, ब्रेडा के निदेशक राहुल कुमार, अपर सचिव डॉ. आदित्य प्रकाश और संयुक्त सचिव शम्स जावेद अंसारी सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे।
VOB का नजरिया: लाइट तो लग गई, अब ‘मेंटेनेंस’ की बारी
9.66 लाख सोलर लाइट्स का आंकड़ा सुनने में काफी प्रभावशाली है और यह ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है कि बैटरी चोरी या तकनीकी खराबी के कारण लाइटें ‘शो-पीस’ बनकर रह जाती हैं। 72 घंटे की समय सीमा और जुर्माने का प्रावधान एक सराहनीय कदम है। अगर पंचायत सचिव ईमानदारी से मोबाइल ऐप पर रिपोर्टिंग करेंगे, तभी यह योजना वास्तव में सफल मानी जाएगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


