सावन में रुद्राभिषेक, जन्मदिन पर निशांत कुमार के पोस्टरों ने चलाई राजनीति में एंट्री की चर्चा

पटना, 20 जुलाई 2025।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने रविवार को सावन के पावन अवसर पर अपने जन्मदिन के मौके पर पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में रुद्राभिषेक कर शिवभक्ति में लीन होकर नया संदेश दिया। इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद निशांत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मेरे पिता ने बिहार के लिए लगातार काम किया है और राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है। मुझे विश्वास है कि जनता उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में फिर से आशीर्वाद देगी।”

पोस्टरों ने दी अटकलों को हवा

इसी बीच पटना स्थित जदयू राज्य कार्यालय के बाहर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पोस्टरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इन पोस्टरों में “बिहार की भविष्य की जरूरत” और “बिहार की मांग सुनने के लिए धन्यवाद” जैसे संदेशों के साथ निशांत कुमार को दिखाया गया है। इससे आगामी 2025 विधानसभा चुनाव से पहले उनके राजनीतिक प्रवेश की अटकलों को बल मिला है।

अब तक राजनीति से दूर, लेकिन चर्चा में नाम

इंजीनियरिंग स्नातक निशांत कुमार ने अब तक राजनीति से दूरी बनाए रखी है। वह सार्वजनिक मंचों से राजनीतिक बयानबाज़ी से भी बचते रहे हैं और एक साधारण जीवन शैली के लिए जाने जाते हैं। बावजूद इसके, जदयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों का मानना है कि अब समय आ गया है कि निशांत कुमार अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएं।

हरनौत से लड़ सकते हैं चुनाव?

पार्टी सूत्रों का मानना है कि अगर निशांत कुमार चुनावी राजनीति में उतरते हैं, तो वे नालंदा जिले की हरनौत सीट से चुनाव लड़ सकते हैं — जो नीतीश कुमार का पुराना निर्वाचन क्षेत्र रहा है। हालांकि इस पर जदयू नेतृत्व की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। कुछ नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि निशांत को पार्टी की भविष्य की एकता और मजबूती के लिए आगे आना चाहिए।

जदयू विधायक गोपाल मंडल जैसे नेता पहले ही कह चुके हैं कि अगर निशांत पार्टी में नहीं आते हैं, तो भविष्य में पार्टी कमजोर हो सकती है।


राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह

नीतीश कुमार का राजनीतिक प्रभाव राज्य में व्यापक रहा है और उन्हें बार-बार मुख्यमंत्री बनने का जनादेश मिला है। ऐसे में अगर निशांत कुमार राजनीतिक मैदान में उतरते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत होगा। सावन के महीने में शिव आराधना के साथ शुरू हुआ यह संकेत, आने वाले महीनों में चुनावी मोड़ ले सकता है।


 

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