भागलपुर में ओवरब्रिज निर्माण पर बवाल: बिना नोटिस जमीन अधिग्रहण का आरोप; सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे, प्रशासन को दी चेतावनी

  • शीतला स्थान चौक से बाईपास जाने वाले रास्ते में प्रस्तावित ROB को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश
  • अखबार में खाता-खेसरा देख उड़े होश; आरोप- ‘प्रशासन ने न नोटिस दिया, न मुआवजे की बात की’
  • छत्रपति शिवा कैलाश बासुकी समाज सेवा समिति का अल्टीमेटम- ‘विकास मंजूर, पर बिना पुनर्वास बेघर होना नहीं’

द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)

​भागलपुर के शिवपुरी और कैलाशपुरी इलाके में प्रस्तावित ओवरब्रिज (ROB) निर्माण की सुगबुगाहट के साथ ही विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। शीतला स्थान चौक से बाईपास को जोड़ने वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय निवासी और दुकानदार सड़क पर उतर आए हैं। ‘छत्रपति शिवा कैलाश बासुकी समाज सेवा समिति’ के बैनर तले चार मोहल्लों के लोगों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

विकास का विरोध नहीं, प्रक्रिया पर सवाल

​प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि वे शहर के विकास या ओवरब्रिज निर्माण के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे यातायात सुगम होगा, यह अच्छी बात है। लेकिन, जिस जमीन पर वे वर्षों से रह रहे हैं और छोटे-मोटे व्यवसाय कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, उसे बिना किसी पूर्व सूचना के छीना जा रहा है।

अखबार से मिली खबर, मच गया हड़कंप

​स्थानीय निवासियों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि प्रशासन ने उनसे सीधा संवाद करने की जहमत नहीं उठाई।

  • ​लोगों ने बताया कि उन्हें जमीन अधिग्रहण की जानकारी सीधे अखबार में प्रकाशित इश्तेहार से मिली, जिसमें उनके मकानों और जमीनों का खाता-खेसरा नंबर दिया गया था।
  • ​बिना किसी आधिकारिक नोटिस के अखबार में अपनी जमीन का विवरण देख लोगों में असमंजस और भय का माहौल बन गया है।

‘पहले मुआवजा और पुनर्वास, फिर काम’

​समिति के सदस्यों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं। उनका कहना है कि:

  1. ​प्रभावित परिवारों को विधिवत कानूनी नोटिस दिया जाए।
  2. ​जमीन और मकान का उचित मुआवजा तय किया जाए।
  3. ​विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था (पुनर्वास) सुनिश्चित की जाए।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

​प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई और जबरन जमीन अधिग्रहण की कोशिश हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। फिलहाल, इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी (DM) के अगले कदम पर टिकी हैं।

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