पटना: बिहार विधानसभा का मानसून सत्र मंगलवार को भी विपक्ष के जोरदार प्रदर्शन की भेंट चढ़ गया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के विधायकों ने वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने के मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग को घेरते हुए सदन में जमकर हंगामा किया। विरोध स्वरूप सभी विधायक काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे और वेल में जाकर नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
तेजस्वी ने उठाया सवाल: वोटर लिस्ट से हालिया वोटरों का नाम क्यों हटा?
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा:
“यह मामला किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। जिन नागरिकों ने हाल ही में लोकसभा चुनाव में मतदान किया था, उन्हीं का नाम अब वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।”
चुनाव आयोग की चुप्पी पर संदेह जताया
तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि
“चुनाव आयोग इतना बेशर्म हो गया है कि वह इस गंभीर मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस तक करने को तैयार नहीं है। आयोग की चुप्पी इस पूरे मामले को संदेहास्पद बना रही है।”
उन्होंने यह भी बताया कि यह मुद्दा कोर्ट, सड़क और सदन—तीनों जगह उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक किसी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
सदन में चर्चा की मांग
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर संज्ञान लें और विधानसभा में इस पर विस्तृत चर्चा कराएं। उन्होंने कहा:
“यह सत्र हमारा अंतिम सत्र है। ऐसे में इस पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। वोटर लिस्ट से नाम हटना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है।”
वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर बिहार की राजनीति में घमासान मच गया है। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है और सरकार व चुनाव आयोग पर जवाबदेही की मांग कर रहा है। अब देखना यह है कि इस संवेदनशील मसले पर सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या आयोग इस पर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण देता है।


