सीजीएम पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, पार्षदों ने मांगी बर्खास्तगी – मेयर ने भी जताई नाराजगी
भागलपुर। नगर निगम सभागार में शनिवार को आयोजित सामान्य बोर्ड की बैठक हंगामेदार रही। बैठक की शुरुआत में ही पार्षद शांडिल्य नंदीकेश ने स्मार्ट सिटी योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। इसके बाद कई पार्षदों ने निगम के सीजीएम संदीप कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल हटाने की मांग की।
पार्षद अभिषेक व पंकज गुप्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सभी योजनाओं की जांच की मांग करेंगे।
हाईमास्ट और सोलर लाइट की खरीद पर सवाल
नंदीकेश ने आरटीआई के हवाले से खुलासा किया कि एक कंपनी ने 6.72 लाख रुपये की लागत से 8 जगहों पर हाइमास्ट लाइट लगाई, जबकि दूसरी कंपनी को 10 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
- बरारी घाट पर 35 लाख रुपये खर्च दिखाए गए।
- बजाज कंपनी की 45 वाट की सोलर लाइट बाजार में 42 हजार रुपये में मिलती है, लेकिन निगम ने 1.30 लाख रुपये प्रति लाइट की दर से 1655 लाइट खरीदी।
- इस पर लगभग 21 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि वास्तविक लागत करीब 7 करोड़ रुपये आती।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि यह जनता के पैसे की खुली लूट है।
ई-टॉयलेट और अन्य योजनाओं पर भी विवाद
मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने कहा कि 3.25 करोड़ रुपये खर्च कर 12 स्थानों पर बनाए गए ई-टॉयलेट बेकार साबित हुए हैं। निगम को केवल “डिब्बा” मिला है। नगर आयुक्त ने सफाई दी कि इस मामले की जांच ईडी और विभागीय स्तर पर चल रही है।
सैंडिस कंपाउंड में जुम्बा क्लास, कृत्रिम तालाब और अन्य योजनाओं पर भी सवाल उठे। पार्षदों ने कहा कि निगम की लापरवाही से जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।
बैठक में तीखी नोकझोंक
हंगामे के बीच सीजीएम संदीप कुमार ने पार्षदों को “बोलने का तरीका सीखने” की नसीहत दे डाली। इसके बाद पार्षद और अधिक आक्रोशित हो गए। स्थिति बिगड़ती देख नगर आयुक्त ने सीजीएम को बैठक से जाने का इशारा किया।
मेयर ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि बोर्ड की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय बिना पार्षदों को भरोसे में लिए लिए जा रहे हैं।
सैंडिस कंपाउंड शुल्क विवाद
बैठक में सैंडिस कंपाउंड में प्रस्तावित प्रवेश शुल्क पर भी भारी विरोध हुआ। पार्षदों और मेयर ने कहा कि इससे खिलाड़ियों और आम नागरिकों को परेशानी होगी। बोर्ड ने शुल्क वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया।
नगर आयुक्त ने बताया कि सुबह 9 बजे तक शुल्क नहीं लगेगा, और शाम के शुल्क को लेकर भी विचार किया जा रहा है।
भागलपुर नगर निगम की इस बैठक ने एक बार फिर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और अन्य योजनाओं में भ्रष्टाचार व अव्यवस्था की पोल खोल दी है। पार्षदों और मेयर की एकजुटता ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में निगम प्रबंधन को जवाबदेह बनाना आसान नहीं होगा।


