पटना: बिहार विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होते ही राज्य में चल रही बोर्ड और इंटर की परीक्षाओं को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। मुद्दा था—परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने के कारण छात्र-छात्राओं को परीक्षा से वंचित किए जाने का।
विपक्ष की महिला और पुरुष दोनों सदस्यों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से संवेदनशील रुख अपनाने की मांग की। विधान पार्षद संजीव कुमार सिंह ने सदन में कहा कि परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण यदि कोई छात्र परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाता है, तो उसे प्रवेश से वंचित करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी वर्षों की पढ़ाई के बाद मैट्रिक या इंटर की परीक्षा देने जाता है और अगर उसे कुछ मिनट की देरी के कारण बाहर कर दिया जाता है, तो इसका उसके मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को गंभीरता से देखना चाहिए।
बीजेपी सदस्य नवल किशोर यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि छात्रों को कई बार 30 से 40 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र दे दिया जाता है। उन्हें और उनके अभिभावकों को पहले से यह अंदाजा नहीं होता कि रास्ते में ट्रैफिक जाम या अन्य बाधाएं आ सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को होम सेंटर दिया जाए या नजदीकी स्कूलों में परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस पर विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस पूरे मामले पर गंभीर है। उन्होंने कहा कि मंत्री सदन में उपस्थित हैं और सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर सरकार संज्ञान लेगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस संवेदनशील विषय पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


