समाचार के मुख्य बिंदु: मालदा डिवीजन की तत्परता से टली बड़ी अनहोनी
- बड़ी कामयाबी: आरपीएफ (RPF) मालदा डिवीजन ने ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत बरहरवा रेलवे स्टेशन पर 3 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
- बचाए गए बच्चे: रेस्क्यू किए गए बच्चों में 1 लड़का और 2 लड़कियां शामिल हैं; सभी की उम्र नाबालिग है।
- झारखंड कनेक्शन: तीनों बच्चे झारखंड के गोड्डा जिले के रहने वाले हैं, जो घर से भागकर दूसरे राज्य मजदूरी के लिए जा रहे थे।
- संदिग्ध स्थिति: प्लेटफॉर्म नंबर 02 पर फुट ओवर ब्रिज (FOB) के पास संदिग्ध हालत में खड़े बच्चों पर आरपीएफ की टीम की पड़ी नजर।
- सुरक्षा दल: एएसआई सुरेश पासवान और कांस्टेबल अनिल कुमार साह की टीम ने सूझबूझ से बच्चों को हिरासत में लिया।
- पुनर्वास: बच्चों को उचित काउंसलिंग और देखरेख के लिए ‘बाल संरक्षण मंथन’, राजमहल (साहिबगंज) को सौंपा गया।
- VOB इनसाइट: बरहरवा जैसे जंक्शन स्टेशनों का उपयोग अक्सर मानव तस्करों द्वारा ट्रांजिट पॉइंट के रूप में किया जाता है; आरपीएफ की यह सक्रियता एक बड़े सिंडिकेट के मंसूबों को नाकाम कर सकती है।
मालदा / बरहरवा | 26 मार्च, 2026
रेलवे सुरक्षा बल (RPF), मालदा डिवीजन ने बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी को रोकने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत बरहरवा रेलवे स्टेशन पर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए आरपीएफ ने तीन मासूमों के भविष्य को अंधकार में जाने से बचा लिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई बुधवार (25 मार्च, 2026) की रात लगभग 20:20 बजे की गई, जब स्टेशन पर नियमित चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था।
प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर ‘फुट ओवर ब्रिज’ के पास हुई पहचान
आरपीएफ पोस्ट बरहरवा के एएसआई सुरेश पासवान और कांस्टेबल अनिल कुमार साह की टीम स्टेशन परिसर में गश्त कर रही थी। इसी दौरान टीम की नजर प्लेटफॉर्म नंबर 02 पर फुट ओवर ब्रिज (FOB) के पास खड़े एक लड़के और दो लड़कियों पर पड़ी। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लग रही थीं और उनके साथ कोई अभिभावक नजर नहीं आ रहा था।
जब आरपीएफ टीम ने उनसे पूछताछ की, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। गहन पूछताछ और प्यार से समझाने पर बच्चों ने खुलासा किया कि वे झारखंड के गोड्डा जिले के रहने वाले हैं और अपने घर से भागकर आए हैं। उनका इरादा किसी दूसरे राज्य में जाकर मजदूरी (Labour work) करने का था।
मानव तस्करी की आशंका और त्वरित कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता और बच्चों की कम उम्र को देखते हुए आरपीएफ ने इसे मानव तस्करी (Human Trafficking) से जोड़कर देखा। बच्चों को तुरंत सुरक्षित रूप से आरपीएफ पोस्ट बरहरवा लाया गया।
अगली कार्रवाई का विवरण:
- सुरक्षित हिरासत: बच्चों को कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आरपीएफ की देखरेख में रखा गया।
- संस्था को सूचना: इसके बाद तुरंत ‘बाल संरक्षण मंथन’, राजमहल (साहिबगंज) को सूचित किया गया।
- काउंसलिंग: बच्चों को उचित देखभाल, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और उनके पुनर्वास के लिए संबंधित संस्था को सौंप दिया गया है।
VOB का नजरिया: ‘नन्हे फरिश्ते’ अभियान की बढ़ती अहमियत
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि रेलवे स्टेशनों पर आरपीएफ की यह सतर्कता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
- मजदूरी का जाल: कम उम्र के बच्चों का ‘मजदूरी’ के बहाने दूसरे राज्यों में जाना अक्सर उन्हें बंधुआ मजदूरी या शोषण के जाल में फंसा देता है।
- गोड्डा-साहिबगंज रूट: यह इलाका मानव तस्करी के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील रहा है। आरपीएफ मालदा डिवीजन ने समय रहते कार्रवाई कर इन बच्चों को एक सुरक्षित भविष्य की ओर वापस मोड़ दिया है।
- अभिभावकों की जिम्मेदारी: बच्चों का घर से भागना पारिवारिक संवाद की कमी को भी दर्शाता है। काउंसलिंग के बाद बच्चों को उनके परिजनों तक पहुँचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
सुरक्षा और संवेदना का संगम
मालदा डिवीजन के आरपीएफ कर्मियों की यह तत्परता सराहनीय है। एएसआई सुरेश पासवान और कांस्टेबल अनिल कुमार साह जैसे जवानों की सतर्कता के कारण ही ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ आज हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस मामले में बच्चों के उनके घर लौटने और इस तस्करी के पीछे किसी संभावित गिरोह के खुलासे की हर अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


