
सासाराम/रोहतास। बिहार के रोहतास जिले में रविवार, 10 मई 2026 को उस वक्त एक बड़ी त्रासदी होते-होते रह गई, जब सासाराम शहर के व्यस्ततम रास्तों में शुमार पुराने जीटी रोड पर एक अनियंत्रित ट्रक ने कोहराम मचा दिया। घटना सासाराम के प्रतिष्ठित एसपी जैन कॉलेज गेट के ठीक सामने की है, जहाँ दोपहर की आपाधापी के बीच एक लोहे की छड़ों से लदा ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गया। यह नजारा इतना भयावह था कि सड़क पर चल रहे दोपहिया वाहन चालक और राहगीर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। ट्रक पर लदे लोहे के मोटे सरिए (छड़) वाहन की बॉडी से कई फीट पीछे बाहर की ओर निकले हुए थे, जो किसी भी पीछे आ रहे वाहन या राहगीर के लिए साक्षात यमराज का जाल साबित हो सकते थे। गनीमत यह रही कि जिस वक्त ट्रक डिवाइडर पर चढ़ा, उस वक्त उसकी चपेट में कोई दूसरा वाहन नहीं आया, वरना यह घटना बिहार के सड़क हादसों के काले पन्नों में एक और बड़ा नाम दर्ज करा सकती थी। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी व्याप्त हो गई और घंटों तक सासाराम-वाराणसी मुख्य पथ की रफ्तार थमी रही।
एसपी जैन कॉलेज गेट के पास बिखरी दहशत
शहर के पुराने जीटी रोड स्थित एसपी जैन कॉलेज का इलाका हमेशा से ही छात्रों और आम नागरिकों की आवाजाही से गुलजार रहता है। रविवार होने के बावजूद यहाँ सड़कों पर चहल-पहल कम नहीं थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक काफी तेज रफ्तार में सासाराम की ओर से आ रहा था। जैसे ही वह कॉलेज गेट के पास पहुँचा, चालक ने अचानक वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया। ट्रक के पहिये भारी शोर के साथ कंक्रीट के डिवाइडर को फांदते हुए उसके ऊपर चढ़ गए। भारी भरकम ट्रक के डिवाइडर पर चढ़ते ही एक जोरदार धमाका हुआ और धूल का गुबार उड़ गया।
घटनास्थल पर मौजूद छात्रों ने बताया कि यदि ट्रक कुछ फुट और दाईं या बाईं ओर मुड़ जाता, तो वहां खड़े कई लोग उसकी चपेट में आ सकते थे। ट्रक की बॉडी के पीछे निकले लोहे के छड़ हवा में खतरनाक तरीके से लहरा रहे थे। सुरक्षा मानकों के अनुसार, जब भी किसी वाहन में ऐसी निर्माण सामग्री लादी जाती है, तो उसके पीछे लाल झंडी या कोई संकेत चिह्न होना अनिवार्य है, लेकिन इस ट्रक में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। लोहे की ये नुकीली छड़ें किसी भी राहगीर को गंभीर रूप से घायल करने या जान लेने के लिए काफी थीं।
लापरवाही का भारी बोझ: ओवरलोडिंग बनी हादसे की वजह
स्थानीय नागरिकों का गुस्सा इस बात को लेकर सबसे अधिक था कि शहर के भीतर भारी वाहनों का प्रवेश और उनकी लोडिंग क्षमता पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। लोगों का आरोप है कि ट्रक पर क्षमता से अधिक वजन लदा हुआ था, जिसके कारण चालक मोड़ या ब्रेक मारते समय संतुलन नहीं बना सका। ओवरलोडिंग के कारण ट्रक का गुरुत्वाकर्षण केंद्र बिगड़ गया और वह डिवाइडर पर चढ़ गया।
सड़क पर गिरी धूल और मलबे के बीच खड़ा वह ट्रक प्रशासन की ढिलाई का प्रतीक नजर आ रहा था। लोगों का कहना है कि व्यावसायिक लाभ के चक्कर में ट्रक मालिक और चालक सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। छड़ों को बांधने के लिए भी पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। यदि ट्रक पलट जाता, तो ये छड़ें सड़क पर चल रहे लोगों के लिए घातक हथियार बन सकती थीं। इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रोहतास की सड़कों पर सुरक्षा भगवान भरोसे है।
सासाराम की सड़कों पर थम गई जिंदगी: घंटों लगा रहा जाम
हादसे के तुरंत बाद पुराने जीटी रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। डिवाइडर पर तिरछा खड़ा ट्रक आधे से अधिक रास्ते को घेरे हुए था। इसके कारण एम्बुलेंस से लेकर बसों तक की आवाजाही ठप हो गई। पुलिस के आने से पहले ही स्थानीय लोगों ने यातायात को सुचारू करने की कोशिश की, लेकिन भारी वाहन के कारण रास्ता खुलना संभव नहीं था।
घटना के दौरान जो अफरा-तफरी मची, उससे सड़क के दोनों किनारों पर पैदल चल रहे लोगों को भी भारी परेशानी हुई। गर्मी और ऊपर से सड़क पर लगा जाम, लोगों के सब्र की परीक्षा ले रहा था। कई यात्रियों को अपनी बसें और ट्रेनें छोड़नी पड़ीं क्योंकि सासाराम शहर के मुख्य प्रवेश मार्ग पर यह अवरोध घंटों तक बना रहा। पुलिस प्रशासन को क्रेन बुलाकर ट्रक को हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रशासन और ट्रैफिक विभाग के खिलाफ सुलगता आक्रोश
हादसे की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग वहां जमा हो गए और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे। नागरिकों का कहना है कि सासाराम में ट्रैफिक पुलिस की तैनाती केवल मुख्य चौराहों पर खानापूर्ति के लिए दिखती है। भारी वाहनों की नियमित जांच, उनके कागजात और सबसे महत्वपूर्ण उनके ‘लोड’ की चेकिंग करने वाला कोई नहीं है।
सासाराम के बुद्धिजीवियों का मानना है कि शहर के पुराने जीटी रोड जैसे संकरे और व्यस्त इलाकों में भारी वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित होना चाहिए, लेकिन नियमों का पालन कराने में विभाग पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लोहे और अन्य निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की जाए। यदि किसी ट्रक की बॉडी से बाहर सामान निकला पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उसका परमिट रद्द किया जाना चाहिए।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी: कब तक दांव पर लगेगी जान?
रोहतास में इस तरह के हादसों की एक लंबी श्रृंखला रही है। एसपी जैन कॉलेज के समीप हुआ यह वाकया कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार ओवरलोड ट्रक और ट्रैक्टरों ने मासूमों की जान ली है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लोहे की छड़ों को ले जाने के लिए विशेष प्रकार के ट्रेलर का उपयोग होना चाहिए, न कि साधारण ट्रकों का।
हादसे के बाद चालक मौके का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा, जो यह बताता है कि उसे भी अपनी गलती और कानूनी कार्रवाई का अहसास था। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और उसके मालिक की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सवाल वही है—क्या इस कार्रवाई के बाद व्यवस्था में सुधार होगा? क्या भविष्य में कोई दूसरा ट्रक इसी तरह छड़ों का जाल लेकर सड़कों पर नहीं दौड़ेगा? जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कड़े कानून का क्रियान्वयन चाहती है।
यातायात पुलिस की निष्क्रियता और बढ़ती चुनौतियां
सासाराम शहर की यातायात व्यवस्था वर्तमान में चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण और ऊपर से इन भारी वाहनों का बेलगाम होना, आम आदमी के लिए सड़क पर निकलना दूभर कर रहा है। ट्रैफिक विभाग को चाहिए कि वह एसपी जैन कॉलेज, रेलवे स्टेशन और मुख्य बाजारों के पास विशेष पिकेट की व्यवस्था करे।
जब तक पुलिस सड़कों पर मुस्तैद नहीं होगी, तब तक ट्रक चालक इसी तरह सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते रहेंगे। आज का यह हादसा एक चेतावनी है कि यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो अगला हादसा किसी की जान ले सकता है। फिलहाल ट्रक को डिवाइडर से हटाकर थाने ले जाया गया है और यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, लेकिन उस दहशत के निशान अभी भी लोगों के जेहन में ताजा हैं जो आज दोपहर पुराने जीटी रोड पर मौत बनकर दौड़ी थी।


