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जातीय जनगणना को लेकर RJD करेगी आंदोलन, लालू के एजेंडे पर आगे बढ़ेंगे तेजस्वी

जातीय जनगणना को सबसे पहले राजनीतिक मुद्दा बनाकर बिहार की सियासत गरमाने वाले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का अधूरा काम अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पूरा करेंगे. जातीय जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने जो स्टैंड दिखाया है. उसके बाद अब आरबीडी नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गई है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज जिस तरह जातीय जनगणना को लेकर अपनी राय रखी है. उससे बड़ा संकेत मिल रहा है. पार्टी सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में आरजेडी जातीय जनगणना को मुद्दा बनाते हुए आंदोलन कर सकती है.

जातीय जनगणना की मांग को लेकर बिहार विधानसभा से दो दफे प्रस्ताव पारित किया गया था. पहली बार साल 2019 में और दूसरी बार 27 फरवरी 2020 को विधानसभा में जब जातीय जनगणना की मांग को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया. तो सभी दलों ने इसका समर्थन किया था. लालू प्रसाद यादव ने जातीय जनगणना को जिस तरह सियासी मुद्दा बनाया, उसके बाद नीतीश कुमार ने भी महसूस किया कि इस मसले पर लालू के साथ जाना ठीक होगा. लिहाजा नीतीश ने भी जातीय जनगणना की मांग का समर्थन किया था.

यही वजह है कि बिहार विधानसभा में जब इसको लेकर प्रस्ताव लाया गया तो सभी दलों ने समर्थन किया. नीतीश सरकार में शामिल बीजेपी ने भी इस मसले पर प्रस्ताव का साथ दिया था. लेकिन अब केंद्र में बैठी बीजेपी ने जातीय जनगणना को लेकर उठ रही मांग खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि साल 2021 की जनगणना में जाति आधारित गणना नहीं होगी.

नीतीश को एक्सपोज करने की तैयारी
जातीय जनगणना की मांग को खारिज किए जाने के बाद भी नीतीश कुमार इस मसले पर बीजेपी का विरोध नहीं कर पाए हैं. जनता दल यूनाइटेड की तरफ से अब तक के जातीय जनगणना को लेकर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. जाहिर है नीतीश की इस चुप्पी की वजह तेजस्वी भली-भांति समझ रहे हैं. यही वजह है कि तेजस्वी यादव अब जातीय जनगणना को लेकर ही नीतीश कुमार को एक्सपोज करने की तैयारी में जुट गए हैं.

तेजस्वी लोगों को यह बताना चाहते हैं कि दरअसल नीतीश कुमार ने विधानसभा में जिस जातीय जनगणना वाले प्रस्ताव का समर्थन किया था. उसकी मांग वह बीजेपी के सामने खुलकर नहीं कर पा रहे हैं. बीजेपी के सामने नीतीश की बोलती बंद है. तेजस्वी यह भी लोगों को बताना चाहते हैं.

आरजेडी को जातीय जनगणना के मसले पर एक तीर से दो शिकार करने का मौका मिल गया है. पहला यह कि तेजस्वी जातीय जनगणना के मुद्दे को लेकर अपने वोट बैंक को मजबूत कर सकते हैं. दूसरी तरफ वह नीतीश को एक्सपोज कर लोगों को यह बता सकते हैं कि दरअसल एनडीए के साथ खड़े नीतीश बीजेपी के सामने कितने बौने हो चुके हैं.

तेजस्वी ने क्या कहा
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जातीय जनगणना को खारिज किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आक्रामक नजर आ रहे हैं. तेजस्वी ने कहा है कि बिहार के दोनों सदनों में BJP जातीय जनगणना का समर्थन करती है. लेकिन संसद में बिहार के ही कठपुतली मात्र पिछड़े वर्ग के राज्यमंत्री से जातीय जनगणना नहीं कराने का एलान करवाती है. केंद्र सरकार OBC की जनगणना क्यों नहीं कराना चाहती? BJP को पिछड़े/अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफ़रत क्यों है?

जनगणना में जानवरों की गिनती होती है. कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, शेर-सियार, साइकिल-स्कूटर सबकी गिनती होती है. कौन किस धर्म का है, उस धर्म की संख्या कितनी है. इसकी गिनती होती है लेकिन उस धर्म में निहित वंचित, उपेक्षित और पिछड़े समूहों की संख्या गिनने में क्या परेशानी है? उनकी गणना के लिए जनगणना किए जाने वाले फ़ॉर्म में महज एक कॉलम जोड़ना है. उसके लिए कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं होना है. अर्थात् सरकार पर कोई वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा.

जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या ज्ञात नहीं होगी तो उनके कल्यानार्थ योजनाएँ कैसे बनेगी? उनकी शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बेहतरी कैसे होगी?  उनकी संख्या के अनुपात में बजट कैसे आवंटित होगा? वो कौन लोग है जो नहीं चाहते कि देश के संसाधनों में से सबको बराबर का हिस्सा मिले?

जातीय जनगणना के लिए हमारे दल ने लंबी लड़ाई लड़ी है और लड़ते रहेंगे. यह देश के बहुसंख्यक यानि लगभग 65 फ़ीसदी से अधिक वंचित उपेक्षित उपहासित प्रताड़ित वर्गों के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है. मोदी सरकार पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती? क्या उन पिछड़े वर्गों के 70-80 करोड़ लोग हिंदू नहीं है?