कोर्ट में फूट-फूट कर रो पड़े RJD विधायक रीतलाल यादव, कहा– ‘हुजूर, मुझे इच्छा मृत्यु दे दीजिए’

पटना, 30 जुलाई 2025:दानापुर से RJD विधायक रीतलाल यादव को बुधवार को पटना सिविल कोर्ट में पेश किया गया, जहां वे न्यायाधीश के समक्ष भावुक हो उठे। अदालत में पेशी के दौरान उन्होंने जज से गुहार लगाई—”हुजूर, मुझे इच्छा मृत्यु दे दीजिए। मेरे ऊपर केस पर केस लादे जा रहे हैं, मेरा कोई पैरवी करने वाला नहीं है। अब मैं थक चुका हूं।”

रीतलाल यादव को भागलपुर जेल से पेशी के लिए पटना लाया गया था, जहां MP-MLA कोर्ट में उनकी सुनवाई हुई। अदालत से बाहर निकलते समय उन्होंने मीडियाकर्मियों से कोई बात नहीं की और चुपचाप आगे बढ़ गए।

बेऊर से भागलपुर जेल में हुई थी शिफ्टिंग

1 मई को पटना की बेऊर जेल से उन्हें भागलपुर केंद्रीय जेल स्थानांतरित किया गया था। उन्हें यहां T-सेल में रखा गया है, जहां कभी बाहुबली अनंत सिंह को भी रखा गया था। माना जा रहा है कि पटना जेल में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे विधायक को प्रशासनिक कारणों से भागलपुर भेजा गया, ताकि उनका संपर्क अपने नेटवर्क से कट जाए।

पुलिस ने पहले बेऊर जेल प्रशासन से आग्रह किया था कि रीतलाल को दो दिन की पेशी के दौरान अपनी जेल में रखा जाए, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। अब उन्हें हर पेशी के लिए भागलपुर से पटना लाया जा रहा है।

रंगदारी के मामले में किया था सरेंडर

दानापुर कोर्ट में 17 अप्रैल को विधायक रीतलाल यादव ने आत्मसमर्पण किया था। उन पर बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और धमकी देने का आरोप है। इस मामले में खगौल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पटना पुलिस ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी, जहां से 10.5 लाख नकद, 77 लाख के ब्लैंक चेक, पेन ड्राइव और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे।

जेल के अंदर सक्रियता बनी चिंता का कारण

सूत्रों के अनुसार, बेऊर जेल में रहते हुए रीतलाल यादव लगातार अपने करीबी लोगों से मुलाकात कर रहे थे। पुलिस को आशंका थी कि वह जेल से ही आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। इसी कारण उन्हें भागलपुर जेल भेजा गया, जहां ना तो उनके करीबी बंद हैं और ना ही आसानी से उनसे मुलाकात संभव है।

90 के दशक से शुरू हुआ था रीतलाल का आपराधिक सफर

रीतलाल यादव का जन्म 16 जनवरी 1972 को दानापुर के कोथावां गांव में हुआ था। 90 के दशक में वह दानापुर स्टेशन के पास राहगीरों से लूटपाट और जमीन कब्जे जैसे मामलों में सक्रिय थे। बाद में उन्होंने स्थानीय जमींदारों और बिल्डरों से सांठगांठ कर बड़ी मात्रा में जमीन सौदे करवाए। इसके बदले उन्होंने मोटी कमाई की, जिससे उनका रसूख और दबदबा बढ़ता चला गया।

2020 के बाद वे रेलवे ठेकों में भी प्रवेश कर गए और सूरजभान गिरोह से जुड़कर रेलवे मंडल में काम करने लगे। धीरे-धीरे वे राजनीति में उतरे और RJD से दानापुर विधानसभा सीट से विधायक बने।


 

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