हाई कोर्ट से RJD नेता लल्लू मुखिया को तगड़ा झटका: CCA रहेगा बरकरार, 10 जून 2026 तक जेल में ही कटेंगी रातें; भागलपुर सेंट्रल जेल में हैं बंद

पटना/भागलपुर | बिहार के बाढ़ इलाके के कद्दावर राजद नेता कर्णवीर सिंह यादव उर्फ लल्लू मुखिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पटना हाई कोर्ट ने लल्लू मुखिया की जमानत की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए उन पर लगाए गए क्राइम कंट्रोल एक्ट (CCA) को बरकरार रखने का बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब लल्लू मुखिया को 10 जून 2026 तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

खबर की मुख्य बातें:

  • हाई कोर्ट का फैसला: साक्ष्यों के आधार पर CCA को सही माना, रिहाई की संभावनाएं खत्म।
  • वर्तमान लोकेशन: भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा (सेंट्रल जेल) के अति सुरक्षित वार्ड में बंद।
  • आरोप: 2023 में नालंदा के कमलेश प्रसाद की हत्या और लंबे समय तक फरारी।

भागलपुर जेल के ‘थर्ड सेक्टर’ में कड़ी सुरक्षा के बीच

​राजद नेता लल्लू मुखिया वर्तमान में भागलपुर की विशेष केंद्रीय कारा के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘थर्ड सेक्टर’ में बंद हैं। सुरक्षा और विधि-व्यवस्था के मद्देनजर जेल आईजी के प्रशासनिक आदेश पर उन्हें बाढ़ जेल से भागलपुर शिफ्ट किया गया था। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, लल्लू मुखिया के बाढ़ या पटना के आस-पास रहने से स्थानीय कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी, जिसके बाद उन्हें भागलपुर के अति-संवेदनशील वार्ड में कड़ी निगरानी में रखा गया है।

क्या है पूरा मामला? (मर्डर और कुर्की-जब्ती की नौबत)

​लल्लू मुखिया पर साल 2023 में नालंदा जिले के कमलेश प्रसाद की हत्या का संगीन आरोप है। यह हत्या बाढ़ क्षेत्र में हुए एक बड़े भूमि विवाद के कारण की गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के बाद लल्लू मुखिया लंबे समय तक पुलिस को चकमा देते रहे। जब पुलिस की दबिश बढ़ी और कुर्की-जब्ती की नौबत आ गई, तब जाकर उन्होंने 29 नवंबर 2025 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। तभी से वे लगातार न्यायिक हिरासत में हैं।

DM ने लगाया था CCA, हाई कोर्ट ने लगाई मुहर

​सरेंडर करने के कुछ ही दिनों बाद, पटना के जिलाधिकारी ने पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर 11 दिसंबर 2025 को लल्लू मुखिया के खिलाफ सीसीए (Crime Control Act) का प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया था। इस फैसले को लल्लू मुखिया के वकीलों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन, हाई कोर्ट ने पुलिस के साक्ष्यों और उनके आपराधिक इतिहास को देखते हुए डीएम के फैसले को सही ठहराया है।

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