केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सीमांचल दौरे को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां इस दौरे को सांप्रदायिक एजेंडे से जोड़ रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे विकास और सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम बता रहा है।
आरजेडी का आरोप: खास वर्ग को टारगेट करने की कोशिश
राष्ट्रीय जनता दल के मनेर विधायक भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि गृहमंत्री का सीमांचल दौरा एक विशेष वर्ग को निशाना बनाने के उद्देश्य से है। उनका कहना है कि जब भी अमित शाह बिहार आते हैं, सांप्रदायिक शक्तियों को बढ़ावा मिलता है।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी कह चुके हैं कि पश्चिम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखते हुए सीमांचल का दौरा किया जा रहा है।
सत्ता पक्ष का पलटवार
वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि अमित शाह के बिहार आते ही विपक्षी नेताओं को “पेट दर्द” शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री बिहार के विकास और सुरक्षा की समीक्षा के लिए आते हैं और इसका बंगाल चुनाव से कोई संबंध नहीं है।
इधर बीजेपी नेता व मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि गृहमंत्री का दौरा घुसपैठ पर रोक लगाने और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
विधानसभा में दलित भूमिहीनों का मुद्दा
इस बीच विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने दलित भूमिहीनों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। आरजेडी विधायक रणविजय साहू समेत विपक्षी दलों ने पोर्टिको में प्रदर्शन करते हुए मांग की कि दलित भूमिहीनों को 3 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई जाए और कथित बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगे।
सीमांचल दौरे के राजनीतिक मायने
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब बिहार की राजनीति पहले से ही गर्म है। एक तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़ रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे सुरक्षा और विकास के एजेंडे का हिस्सा बता रहा है। आने वाले दिनों में इस दौरे के राजनीतिक असर को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।


