बागमती के बढ़ते जलस्तर से संकट, लोगों को 10 की जगह 50 KM का चक्कर लगाने की मजबूरी

मुजफ्फरपुर: नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार में साफ दिखाई देने लगा है। मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सबसे अधिक प्रभावित कटरा प्रखंड का उत्तरी इलाका है, जहां 14 पंचायतों का सड़क संपर्क प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह टूट गया है।

कटरा पीपा पुल के दोनों ओर सड़क पर करीब दो फीट पानी का तेज बहाव होने से आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। बसघट्टा, लखनपुर, पहसौल, खंगुराडीह, नगवारा, चंगेल, कटाई, यजुआर पूर्वी, यजुआर पश्चिमी, बेलपकौना, बंधपुरा, बरीं और तेहबारा पंचायतों के लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

2-10 किलोमीटर की दूरी के लिए 50 किलोमीटर का चक्कर

सड़क संपर्क टूटने के कारण लोगों को अब प्रखंड मुख्यालय पहुंचने के लिए 2 से 10 किलोमीटर की जगह लगभग 50 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। प्रशासन ने जलस्तर घटने पर मोटरसाइकिल आवागमन शुरू कराया था, लेकिन नदी का पानी फिर बढ़ने से यह व्यवस्था भी केवल एक दिन ही चल सकी।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता, रातभर कर रहे निगरानी

बकुची, पतारी, अंदामा, नवादा, गंगया, बरी, भवानीपुर और माधोपुर समेत कई गांवों में बाढ़ की आशंका गहरा गई है। ग्रामीण रातभर जागकर नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं।

स्थानीय निवासी धर्मेंद्र कमती ने बताया कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

प्रशासन अलर्ट, तैयारियों का दावा

कटरा की अंचलाधिकारी सुशीला कुमारी ने बताया कि बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

औराई प्रखंड में भी बढ़ा खतरा

औराई प्रखंड में भी सोमवार दोपहर से बागमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कटौझा में नदी खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। यदि जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही तो चंवर क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका है।

हजारों परिवारों में दहशत

नदी की तलहटी में गाद जमा होने के कारण पानी धीरे-धीरे ऊपरी क्षेत्रों में फैल रहा है, लेकिन कटरा के निचले इलाकों में बाढ़ का असर तेजी से दिखने लगा है। औराई प्रखंड के एक दर्जन विस्थापित गांवों के हजारों परिवार भय के साये में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नेपाल से पानी का दबाव इसी तरह बना रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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