भागलपुर, 6 अगस्त | तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) स्थित गर्ल्स हॉस्टल इन दिनों गंगा नदी के विकराल रूप का शिकार बन गया है। बढ़ते जलस्तर के चलते बाढ़ का पानी हॉस्टल में घुस चुका है, जिससे छात्राओं का रहना दूभर हो गया है। इस आपदा से परेशान होकर कई छात्राएं हॉस्टल खाली कर अपने घर लौटने को मजबूर हो गई हैं।
पानी से घिरा हॉस्टल, रास्ता हुआ बंद
विश्वविद्यालय परिसर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगा नदी का पानी तेजी से हॉस्टल के आसपास फैल गया है, जिससे आने-जाने के रास्ते में पानी भर गया है। छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल के अंदर सीलन, दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। बिजली की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। खाद्य सामग्री, दवाइयों और पीने के पानी तक पहुंच पाना भी कठिन हो गया है।
छात्राओं ने प्रशासन से लगाई गुहार
छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों से तत्काल राहत की मांग की है। एक छात्रा ने कहा,
“हम परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब सबकुछ बाढ़ की भेंट चढ़ गया है। न पढ़ाई हो पा रही है, न सुरक्षित रह पा रहे हैं।”
जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान, राहत की तैयारी में जुटा प्रशासन
भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थिति का व्यापक आकलन करने की बात कही है। उन्होंने कहा:
“गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय परिसर और हॉस्टल क्षेत्र पर विशेष नजर रखी जा रही है। ज़रूरत पड़ने पर नाव, रिलीफ कैंप और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी।”
डीएम ने यह भी कहा कि जल्द ही विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर राहत और पुनर्व्यवस्था पर निर्णय लिया जाएगा।
परिसर में शरण ले रहे स्थानीय लोग भी संकट में
बाढ़ से प्रभावित कुछ आस-पास के ग्रामीण परिवार टीएमबीयू परिसर में शरण लिए हुए हैं। प्रशासन अब इन लोगों की आवास, भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है। जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण यूनिवर्सिटी परिसर एक संभावित राहत शिविर केंद्र बनता जा रहा है।
स्थिति गंभीर, राहत कार्यों की निगरानी ज़रूरी
बाढ़ की यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था, छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक तत्परता की परीक्षा बन गई है। अब देखना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से छात्राओं को राहत पहुंचाने में सफल होते हैं।


