
बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। कथित भ्रष्टाचार, टेंडर आवंटन में अनियमितताओं और ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े नेटवर्क की जांच अब उच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियों की सक्रियता के बीच दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की संभावना तेज हो गई है। वहीं दूसरी ओर कई निजी कंपनियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई हैं, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जुटाए जा रहे दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर अब जांच का दायरा व्यापक होता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
प्रशासनिक गलियारों में बढ़ी हलचल
टेंडर घोटाले से जुड़े इस मामले में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा प्रमुख हैं। जांच एजेंसियों ने दोनों अधिकारियों की भूमिका को लेकर कई बिंदुओं पर जांच की है और अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से आवश्यक अनुमति मांगी है। सरकारी सेवा में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया के तहत यह अनुमति जरूरी मानी जाती है।
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि मामला केवल एक टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहकर शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली से भी जुड़ गया है।
पहले ही हो चुका है निलंबन
जांच के शुरुआती चरण में जब दोनों अधिकारियों के नाम सामने आए थे, तब सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। यह कदम मामले की गंभीरता को देखते हुए उठाया गया था ताकि जांच प्रभावित न हो और एजेंसियां स्वतंत्र रूप से साक्ष्य जुटा सकें।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां केवल दो अधिकारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों की भूमिका का भी अध्ययन कर रही हैं। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े वित्तीय घोटाले में केवल एक या दो व्यक्तियों की भूमिका नहीं होती, बल्कि पूरी प्रक्रिया और निर्णय प्रणाली की जांच जरूरी होती है।
ED और SVU के बीच बढ़ा समन्वय
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और स्पेशल विजिलेंस यूनिट के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार ED द्वारा जुटाए गए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय जानकारियां SVU को उपलब्ध कराई गई हैं।
इन दस्तावेजों के आधार पर निगरानी विभाग से भी मार्गदर्शन लिया गया है। इसके साथ ही पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर महाधिवक्ता से राय लेने की भी जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियां चाहती हैं कि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई पूरी तैयारी और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर की जाए ताकि अदालत में मामला टिक सके।
सहरसा में जांच टीम की बड़ी कार्रवाई
मामले की जांच के तहत मंगलवार को स्पेशल विजिलेंस यूनिट की एक टीम सहरसा पहुंची। वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में पहुंची टीम ने नगर निगम कार्यालय में कई घंटों तक दस्तावेजों की जांच की।
इस दौरान टेंडर प्रक्रिया, परियोजनाओं के आवंटन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। अधिकारियों से पूछताछ भी की गई और कई महत्वपूर्ण फाइलें जांच के लिए अपने कब्जे में ली गईं।
सूत्रों के अनुसार जांच टीम को कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो आगे की जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि एजेंसियों ने आधिकारिक रूप से इन दस्तावेजों की प्रकृति के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है।
15 कंपनियां जांच एजेंसियों के रडार पर
इस पूरे प्रकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू उन निजी कंपनियों से जुड़ा है जिन्हें विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के तहत ठेके दिए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार लगभग 15 कंपनियां फिलहाल ED की निगरानी में हैं।
आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कुछ कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए सरकारी परियोजनाएं दी गईं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी या नहीं।
वित्तीय लेनदेन, मालिकाना ढांचा, परियोजना आवंटन और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
BUDCO और अन्य विभागों के प्रोजेक्ट भी जांच के घेरे में
जांच में यह बात सामने आई है कि जिन कंपनियों की भूमिका की जांच हो रही है, उन्हें बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (BUDCO) से बड़ी संख्या में परियोजनाएं मिली थीं।
इसके अलावा जल संसाधन विभाग और भवन निर्माण विभाग के कई प्रोजेक्ट भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन परियोजनाओं के आवंटन में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो यह राज्य के कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है।
रिशु श्री से जुड़े कनेक्शन की तलाश
जांच एजेंसियों का प्रमुख फोकस कथित तौर पर रिशु श्री और संबंधित कंपनियों के बीच संबंधों की पड़ताल करना है। ED पहले भी कई कंपनियों के दस्तावेजों की जांच कर चुकी है और कुछ मामलों में संबंधों के संकेत मिलने की बात सामने आई है।
एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कंपनियों का वास्तविक नियंत्रण किन लोगों के हाथों में था और टेंडर प्रक्रिया में उनकी भूमिका क्या थी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी व्यक्ति ने पर्दे के पीछे रहकर कंपनियों का संचालन तो नहीं किया।
वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और कॉर्पोरेट दस्तावेजों की जांच इसी दिशा में की जा रही है।
ब्लैकलिस्ट कंपनियों को ठेका मिलने की आशंका
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण आरोप यह भी सामने आया है कि कुछ कंपनियों को प्रतिबंधित या डिबार किए जाने के बावजूद सरकारी ठेके दिए गए हो सकते हैं।
यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं में भाग लेने वाली कंपनियों की पात्रता की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि इसमें लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
आगे और बढ़ सकती है कार्रवाई
जांच एजेंसियों का मानना है कि अभी जांच शुरुआती महत्वपूर्ण चरण में है और आने वाले दिनों में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। दस्तावेजों के सत्यापन, वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और अधिकारियों से पूछताछ के बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
फिलहाल संबंधित कंपनियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और कई मामलों में नए कार्य आवंटित नहीं किए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की अनियमितता दोबारा न हो।
बिहार की राजनीति और प्रशासन पर भी असर
यह मामला अब केवल एक टेंडर घोटाले तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों, सरकारी परियोजनाओं और बड़ी कंपनियों के नाम सामने आने के कारण इसका असर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी देखा जा रहा है।
जनता और विपक्ष दोनों की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह बिहार के हालिया वर्षों के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक बन सकता है।
फिलहाल सभी की नजर सरकार, SVU और ED की अगली रिपोर्ट पर है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में इस मामले में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई थीं या नहीं।


