गया। बोधगया की रहने वाली 65 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका मनोरमा पांडे इन दिनों गंभीर ब्रेन बीमारी से जूझ रही हैं। 14 मार्च 2026 को वेल्लोर में उनकी ब्रेन सर्जरी प्रस्तावित है, लेकिन इलाज के लिए जरूरी पैसों की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अपना हक का पैसा होते हुए भी वे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हैं।
2020 में रिटायर, अब तक नहीं मिली पेंशन
मनोरमा पांडे वर्ष 2020 में बोधगया के एक प्राथमिक विद्यालय से सेवानिवृत्त हुई थीं। इसके बावजूद अब तक उन्हें न तो पेंशन मिली है और न ही 2011 से अर्जित अवकाश और अंतर वेतनमान का भुगतान किया गया है। उनका आरोप है कि जिला शिक्षा कार्यालय में रिश्वत न देने के कारण उनकी फाइल जानबूझकर आगे नहीं बढ़ाई गई।
मनोरमा पांडे ने कहा,
“मेरे ब्रेन में दिक्कत है, ज्यादा बोलने से सिर में झुनझुनी होने लगती है। ऑपरेशन कराना है, लेकिन मेरा पैसा मुझे ही नहीं मिल रहा। डीएम साहब ने 15 दिन में भुगतान का आश्वासन दिया है।”
“एक अधिकारी के पास सारे कागजात, फिर भी सुनवाई नहीं”
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा कार्यालय के एक अधिकारी के पास उनके सभी दस्तावेज मौजूद हैं। उनके पति कई बार कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
30 साल से भुगतान के लिए भटक रहे सेवानिवृत्त शिक्षक
मंगलवार को गया में आयोजित शिक्षकों की जन सुनवाई में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए। औरंगाबाद के दाऊदनगर निवासी प्रहलाद प्रसाद सिन्हा, जो 2005 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, पिछले 30 वर्षों से अंतर वेतनमान के भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“30 साल में कम से कम 50 चप्पल घिस गई होंगी। एक लाख से ज्यादा की राशि मिलनी है, लेकिन आने-जाने में ही 25 हजार खर्च हो गए। 75 साल की उम्र में कब तक दौड़ेंगे?”
डीएम शशांक शुभंकर का सख्त रुख
जन सुनवाई में जब डीएम शशांक शुभंकर इन मामलों से रूबरू हुए तो उन्होंने जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। डीईओ से सीधे सवाल करते हुए उन्होंने कहा—
“जब कोई अपनी समस्या लेकर बार-बार आता है, फिर भी काम क्यों नहीं होता? शिक्षक परेशान रहेगा तो बच्चों को अच्छी शिक्षा कैसे मिलेगी?”
डीएम ने लापरवाह कर्मियों पर वेतन रोकने, स्पष्टीकरण लेने और निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए।
रिश्वतखोरी की शिकायत पर निगरानी जांच
प्रधानाध्यापक शशि रंजन पटेल ने खुलेआम जिला शिक्षा कार्यालय में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिना पैसे लिए कोई काम नहीं होता। इस पर डीएम ने तत्काल जिला निगरानी धावा दल को जांच के आदेश दिए और 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा।
तीन लिपिकों पर गिरी गाज
जन सुनवाई के दौरान तीन लिपिकों पर कार्रवाई की गई।
- दो लिपिकों के वेतन पर तत्काल रोक
- एक लिपिक अंगिरा कुमार को वेतन रोकने के साथ दूरस्थ प्रखंड कार्यालय में स्थानांतरित करने का आदेश
- विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश
“लापरवाह कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा” – डीएम
डीएम शशांक शुभंकर ने कहा,
“स्थापना से जुड़े 180 मामले सामने आए हैं। कई मामलों में लापरवाही पाई गई है। दोषी कर्मियों के निलंबन का प्रस्ताव भेजा जाएगा। रिश्वत के मामलों में एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई होगी।”
उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों का निपटारा पहले ही किया जा चुका है और शेष मामलों के लिए 15 दिन की समयसीमा तय की गई है।


