फेक टीआरपी केस में फंसे रिपब्लिक टीवी की बढ़ीं मुश्किलें, अब एंकर-संपादकों पर केस दर्ज

फर्जी टीआरपी केस (Fake TRP Case) में फंसे रिपब्लिक टीवी (Republic TV) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को रिपब्लिक टीवी की एडिटोरियल टीम के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। एडिटोरियल टीम पर मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के कर्मियों के बीच वैमनस्यता फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।

एनएम जोशी मार्ग पुलिस ने रिपब्लिक की एडिटोरियल टीम के खिलाफ पुलिस ऐक्ट 1922 की धारा 3 (1) और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। शिकायतकर्ता सब इंस्पेक्टर शशिकांत पवार ने अपनी शिकायत में रिपब्लिक टीवी की डेप्युटी एडिटर सागरिका मित्रा, एंकर शिवानी गुप्ता, डेप्युटी एडिटर शावन सेन, कार्यकारी संपादक निरंजन नारायणस्वामी और अन्य संपादकीय स्टाफ को नामजद किया है।

शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने एक शो ऑन एयर किया था जो मुंबई पुलिस के कर्मियों में आपसी वैमनस्यता फैलाने वाला है। इससे मुंबई पुलिस की मानहानि भी हुई है।

22 अक्टूबर को ऑन एयर हुए शो के चलते दर्ज हुआ केस

एफआईआर में कहा गया है कि शशिकांत पवार 22 अक्टूबर को शाम 7 बजे रिपब्लिक टीवी देख रहे थे। उसी वक्त ‘शाम की सबसे बड़ी खबर’ फ्लैश हुई। शो में एंकर शिवानी गुप्ता पूछती हैं, ‘क्या मुंबई पुलिस में परमबीर (पुलिस कमिश्नर) के खिलाफ विद्रोह हो गया है? वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।’ शिकायत में कहा गया है कि एंकर ने परमबीर पर आरोप लगाया कि वह मुंबई पुलिस का नाम खराब कर रहे हैं और अपने व्यक्तिगत हित साधने के लिए काम कर रहे हैं।

गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज, 3 साल तक की सजा का प्रावधान
शिकायकर्ता ने कहा कि शिवानी गुप्ता आगे कहती हैं कि रिपब्लिक टीवी के पास ऐसे सबूत हैं जो साबित करते हैं कि मुंबई पुलिस कमिश्नर के खिलाफ फोर्स में विद्रोह हो गया है। पुलिस एक्ट की जिस धारा में केस दर्ज हुआ है उसमें 3 साल कैद का प्रावधान है और यह गैर जमानती धारा है।

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