IAS के के पाठक को राहत..पटना हाईकोर्ट ने सशरीर उपस्थित होने से दी छूट

बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव IAS के के पाठक को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है.कोर्ट ने उन्हें अवमानना के मामले में आरोप तय करने हेतु हाजिर होने से मुक्त कर दिया है। जस्टिस पी बी बजनथ्री की खंडपीठ ने विजेंद्र कुमार सिंह अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पाठक को अवमानना मामले में आरोप तय करने हेतु व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने से मुक्त कर दिया।

ये मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य में 32540 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा है।2016 में हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि उपरोक्त 32540 में जितने भी खाली बची हुई रिक्त सीटें हैं,उन्हें एक बार की प्रक्रिया में भर दिया जाए।

उसे समय तकरीबन हजार मामलें ऐसे थे, जिसमें कई सहायक शिक्षकों शिक्षकों की नियुक्तियां फर्जी दस्तावेज के आधार पर हुई थी।हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि फर्जीवाड़े से नियुक्त हुए शिक्षकों को निकालने के बाद वैसी हजार रिक्तियां बची हुई मानी जाएगी ।इसीलिए अन्य अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच 3 महीने में करते हुए उन हजार उम्मीदवारों को भरने का निर्देश हाईकोर्ट ने दिया था।

गौरतलब है कि इस आदेश के 7 साल होने के बावजूद हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने उक्त आदेश के अनुपालन में एक भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया है।गत 25 जुलाई को इसी खंडपीठ ने सरकार के इस रवैया पर नाराजगी जाहिर करते हुए अपर मुख्य सचिव केके पाठक को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था ।

सुनवाई के दौरान अवमानना मामले में पाठक की तरफ से उनके वकील नरेश दीक्षित ने कोर्ट को हलफनामा देते हुए बताया कि पिछले 7 सालों में विलंब का कारण विभाग एवं बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के बीच तालमेल की कमी रही। आयोग को शिक्षक अभ्यार्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच परख कर नियुक्ति हेतु अनुशंसा करने की।इसमें देर हो रही थी लेकिन केके पाठक ने,जब से कार्यभार संभाला, हाईकोर्ट में लंबित मामलों,जो शिक्षा विभाग से जुड़े थे,उन पर तेजी से कार्रवाई शुरु की गायी।

अधिवक्ता दीक्षित ने बताया कि इस महीने की 6 तारीख को ही जैसे ही आयोग की तरफ से सुयोग्य अभ्यार्थियों के चयन हेतु अनुशंसा मिली, उसी समय स्वयं अपर मुख्य सचिव ने पूरे शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए उसी समय नियुक्ति पत्र समूह का जारी कर दिया।इस मामलें पर अगली सुनवाई 23 अगस्त,2023 को की जाएगी।

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