दानापुर में बेखौफ बदमाशों का तांडव: गैस कटर से 20 मिनट में चीरा एसबीआई का सीना, 30 लाख लेकर चंपत; पुलिस की सुस्ती पर उठे गंभीर सवाल

पटना/दानापुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।राजधानी पटना के दानापुर इलाके में अपराधियों ने एक बार फिर पुलिसिया इकबाल को ठेंगा दिखाते हुए एक बड़ी दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया है। मंगलवार की अल सुबह, जब पूरा शहर गहरी नींद में था, तब शाहपुर थाना क्षेत्र के ढिबड़ा मोड़ पर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एटीएम में गैस कटर की चिंगारियां उठीं और महज 20 मिनट के भीतर अपराधी 30 लाख रुपये की मोटी रकम लेकर रफूचक्कर हो गए। इस घटना ने न केवल बैंक की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि सूचना मिलने के बावजूद पुलिस के देरी से पहुंचने के आरोपों ने खाकी की कार्यशैली पर भी गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं। अपराधी इतने शातिर थे कि उन्होंने सुबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी कैमरों पर स्प्रे तक किया, लेकिन उनकी ये चालाकी बैंक के हाई-टेक अलार्म सिस्टम को मात नहीं दे सकी, बावजूद इसके पुलिस का ‘रिस्पॉन्स टाइम’ अपराधियों के भागने का रास्ता सुगम बना गया।

​ढिबड़ा मोड़: सन्नाटे का फायदा और गैस कटर की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​शाहपुर थाना क्षेत्र के नरगदा स्थित ढिबड़ा मोड़ पर लगा एसबीआई का यह एटीएम लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से ‘सॉफ्ट टारगेट’ बना हुआ था। ग्रामीण इलाका होने के कारण यहां रात 10 बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है। मंगलवार तड़के करीब 4 बजे, जब सड़कों पर केवल सन्नाटा और हल्की धुंध थी, तीन नकाबपोश बदमाश एक सफेद रंग की गाड़ी से वहां पहुंचे। बदमाशों के पास गैस कटर, ऑक्सीजन सिलेंडर और एटीएम को काटने के आधुनिक औजार मौजूद थे। एटीएम केबिन में घुसते ही सबसे पहले उन्होंने भीतर से शटर गिरा दिया ताकि बाहर से गुजरने वाले किसी राहगीर को भीतर हो रही हलचल का आभास न हो सके। इसके बाद शुरू हुआ 20 मिनट का वो ‘ऑपरेशन’ जिसने बैंक के कैश चैंबर को लोहे के मलबे में तब्दील कर दिया।

​शातिराना अंदाज: दस्ताने, स्प्रे और धुंधली तस्वीरों का खेल

​बैंक द्वारा पुलिस को उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज और शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अपराधी पेशेवर थे। एटीएम में प्रवेश करते ही एक बदमाश ने हाथ में लिए स्प्रे पेंट से केबिन में लगे कैमरों के लेंस पर छिड़काव कर दिया, ताकि उनकी पहचान न हो सके। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान उनकी शुरुआती कद-काठी और हरकतें रिकॉर्ड हो गईं। अपराधियों ने फिंगरप्रिंट न छूटे, इसके लिए हाथों में दस्ताने पहन रखे थे। गैस कटर की तेज लौ से उन्होंने एटीएम मशीन के उस हिस्से को बड़ी सफाई से काटा जहां कैश ट्रे रखी होती है। महज 20 मिनट के भीतर उन्होंने मशीन को चीरकर उसमें रखे करीब 30 लाख रुपये निकाल लिए और कैश चैंबर के साथ ही फरार हो गए।

​बैंक बनाम पुलिस: सूचना के बाद भी क्यों हुई देरी?

​इस पूरे प्रकरण में सबसे विवादित पहलू पुलिस की प्रतिक्रिया का समय रहा है। एसबीआई के मुख्य कार्यालय के अधिकारियों का दावा है कि जैसे ही एटीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ शुरू हुई, बैंक के सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम ने तुरंत अलार्म जनरेट कर दिया। बैंक के सुरक्षा विभाग ने बिना एक पल गंवाए इसकी सूचना शाहपुर और दानापुर थाने को दे दी थी। बैंक अधिकारियों का सीधा आरोप है कि अगर पुलिस सूचना मिलते ही सक्रिय होती और महज 5 से 7 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच जाती, तो अपराधियों को रंगे हाथ पकड़ा जा सकता था। लेकिन, पुलिस तब पहुंची जब अपराधी अपना काम पूरा कर सुरक्षित निकल चुके थे। बैंक का यह आरोप पटना पुलिस की गश्त और ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ (QRT) के दावों पर कड़वे सवाल खड़े कर रहा है।

​एएसपी और सिटी एसपी की एंट्री: एसआईटी का गठन

​वारदात की जानकारी मिलते ही दानापुर के एएसपी शिवम धाकड़ भारी पुलिस बल के साथ ढिबड़ा मोड़ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के दुकानदारों व ग्रामीणों से पूछताछ की। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी एसपी (पश्चिमी) भानु प्रताप सिंह ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में दानापुर और शाहपुर के थानाध्यक्षों के अलावा साइबर और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को भी शामिल किया गया है। सिटी एसपी ने बताया कि अपराधियों ने जिस गैस कटर का इस्तेमाल किया है, वह किसी बड़े निर्माण कार्य या कबाड़ दुकान से संबंधित हो सकता है। पुलिस अब उन रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, जिनसे अपराधी भागे हैं। पुलिस का दावा है कि बदमाशों के भागने की दिशा का पता चल गया है और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

​गार्ड विहीन एटीएम: सुरक्षा मानकों की अनदेखी

​ढिबड़ा मोड़ स्थित इस एटीएम की एक बड़ी कमजोरी यह भी रही कि यहां बैंक की ओर से किसी सुरक्षा गार्ड की तैनाती नहीं की गई थी। ग्रामीण इलाकों में बैंकों द्वारा अक्सर गार्ड की सुविधा नहीं दी जाती, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं। ढिबड़ा मोड़ जैसे सुनसान पॉइंट पर बिना गार्ड के लाखों रुपये छोड़ देना अपराधियों के लिए खुली दावत जैसा था। पुलिस का तर्क है कि बैंकों को बार-बार निर्देश दिया जाता है कि संवेदनशील इलाकों के एटीएम में सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं और मशीन को जमीन से कंक्रीट के जरिए मजबूती से जोड़ा जाए, लेकिन अक्सर इन मानकों की अनदेखी की जाती है। हालांकि, बैंक अधिकारियों का कहना है कि उनकी इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणाली ने अपना काम कर दिया था, लेकिन पुलिस की जमीन पर मुस्तैदी की कमी ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

​अपराधियों का ‘मोडस ऑपेरंडी’: क्या किसी अंतरराज्यीय गिरोह का हाथ है?

​गैस कटर से एटीएम काटने की यह शैली बिहार में पहले भी देखी गई है। अक्सर मेवात या हरियाणा के गिरोह इस तरह की वारदातों को अंजाम देने के लिए राज्यों की सीमाएं लांघकर आते हैं। दानापुर पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि क्या स्थानीय अपराधियों ने बाहरी गैंग की मदद ली है या यह पूरी तरह से किसी अंतरराज्यीय गिरोह का काम है। अपराधियों ने जिस तरह से कैमरे पर स्प्रे किया और दस्ताने पहने, वह उनकी पेशेवर ट्रेनिंग की ओर इशारा करता है। पुलिस अब पिछले छह महीनों में बिहार और पड़ोसी राज्यों में हुई ऐसी ही वारदातों का रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि अपराधियों के ‘पैटर्न’ का मिलान किया जा सके।

​ग्रामीण इलाके में दहशत: कानून-व्यवस्था पर अविश्वास

​शाहपुर और दानापुर के ग्रामीण इलाकों में इस चोरी के बाद से ही व्यापारियों और आम लोगों के बीच डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर थाने से कुछ ही दूरी पर अपराधी 20 मिनट तक तांडव मचा सकते हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या होगा? स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के समय पुलिस की गश्त केवल मुख्य सड़कों तक सीमित रहती है, जबकि गलियों और मोड़ों पर अपराधियों का राज होता है। ढिबड़ा मोड़ के दुकानदारों ने बताया कि इस इलाके में पहले भी छोटी-मोटी चोरियां हुई हैं, लेकिन 30 लाख की इस बड़ी डकैती ने पुलिस की सतर्कता की पोल खोल दी है।

​निष्कर्ष: तकनीक और मुस्तैदी का तालमेल जरूरी

​दानापुर का यह एटीएम कांड एक बड़ा सबक है कि केवल तकनीक के भरोसे सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। जब तक बैंक की तकनीकी सूचना और पुलिस की भौतिक सक्रियता के बीच एक मजबूत तालमेल नहीं होगा, तब तक अपराधी ऐसे ही ’20 मिनट के गेम’ में सिस्टम को मात देते रहेंगे। 30 लाख रुपये की यह चोरी पटना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब देखना यह है कि भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठित एसआईटी इन ‘गैस कटर गैंग’ के सदस्यों को कितनी जल्दी सलाखों के पीछे पहुंचाती है। क्या पुलिस बैंक के उन आरोपों का जवाब दे पाएगी कि वे समय पर क्यों नहीं पहुंचे? फिलहाल, दानापुर की गलियों में सन्नाटा तो है, लेकिन पुलिस के सायरन और जांच की तपिश तेज हो गई है।

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