
समाचार के मुख्य बिंदु: ध्वजागली में गूंजा जय श्री राम का उद्घोष
- बड़ा आयोजन: रामनवमी के पावन अवसर पर सुल्तानगंज के ऐतिहासिक ‘मूंछ वाले हनुमान मंदिर’ में विशेष पूजा और महाआरती का आयोजन किया गया।
- अनोखी पहचान: बिहार और झारखंड में प्रसिद्ध यह मंदिर अपनी विशिष्ट प्रतिमा (मूंछ वाले हनुमान जी) के लिए जाना जाता है, जहाँ मन्नतें पूरी होने का अटूट विश्वास है।
- भक्तों का सैलाब: सुबह से ही ध्वजारोहण और पताका पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं; दोपहर की महाआरती में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया।
- साप्ताहिक परंपरा: मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को संध्या महाआरती की परंपरा है, लेकिन रामनवमी पर इसे और भी भव्य रूप दिया गया।
- आगामी कार्यक्रम: रामनवमी के समापन के अवसर पर 28 मार्च (शनिवार) की संध्या में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
- VOB इनसाइट: सुल्तानगंज केवल गंगा स्नान के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। ‘मूंछ वाले हनुमान’ का स्वरूप शक्ति और पौरुष का प्रतीक माना जाता है, जो इसे पूरे क्षेत्र में अद्वितीय बनाता है।
सुल्तानगंज (भागलपुर) | 28 मार्च, 2026
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड में रामनवमी का उल्लास अपने चरम पर है। शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान राम और संकटमोचन की आराधना हो रही है, लेकिन ध्वजागली स्थित ‘मूंछ वाले हनुमान मंदिर’ में नजारा कुछ खास ही रहा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के इस अनोखे स्वरूप के दर्शन किए और महाआरती में शामिल होकर सुख-शांति की कामना की।
मूंछ वाले हनुमान जी: वर्षों पुरानी विरासत और अनोखी गाथा
सुल्तानगंज का यह मंदिर केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि बिहार और पड़ोसी राज्य झारखंड के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का बड़ा केंद्र है।
मंदिर की विशिष्टताएं:
- प्रतिमा का स्वरूप: यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा मूंछों के साथ है, जिसे वर्षों पूर्व स्थापित किया गया था। भक्त मानते हैं कि यह स्वरूप हनुमान जी के ‘महावीर’ और ‘रक्षक’ वाले भाव को प्रदर्शित करता है।
- ऐतिहासिक महत्व: मंदिर कमेटी के सदस्यों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण दशकों पहले हुआ था और तब से ही यहाँ मंगलवार की संध्या महाआरती की अटूट परंपरा चली आ रही है।
- ध्वजा पूजन: रामनवमी के मौके पर सुबह से ही भक्तों ने मंदिर परिसर में ‘महावीरी पताका’ (ध्वज) का पूजन किया और इसे मंदिर के शिखर तथा अपने घरों पर स्थापित किया।
महाआरती में उमड़ा जनसैलाब: भक्ति और ऊर्जा का संगम
दोपहर के समय आयोजित विशेष महाआरती के दौरान ध्वजागली का पूरा इलाका केसरिया रंग में रंगा नजर आया। शंख, डमरू और घंटों की गूँज के बीच जब महाआरती शुरू हुई, तो हजारों भक्तों ने एक साथ स्वर मिलाकर जयकारे लगाए।
- भक्तों की मनोकामना: महाआरती में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि इस दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। खासकर युवाओं में बजरंगबली के प्रति जबरदस्त क्रेज देखा गया।
- प्रबंधन: भीड़ को नियंत्रित करने और पूजा को सुव्यवस्थित करने के लिए मंदिर समिति के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाल रखा था।
कल सजेगा विशाल भंडारा: 28 मार्च को महाप्रसाद का वितरण
रामनवमी के इस महापर्व को और भी यादगार बनाने के लिए ‘बजरंगबली युवा समिति’ ने व्यापक तैयारी की है।
- विशेष सूचना: समिति के सदस्यों ने घोषणा की है कि 28 मार्च (शनिवार) की संध्या में मंदिर परिसर में एक भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
- आमंत्रण: इस भंडारे में सुल्तानगंज और आसपास के हजारों लोगों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से इस महाप्रसाद को ग्रहण करने की अपील की है।
आयोजन समिति के जांबाज कार्यकर्ता
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में ‘बजरंगबली युवा समिति’ के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया है। प्रमुख रूप से उपस्थित सदस्यों में शामिल हैं:
- विक्की गुप्ता, संतोष गुप्ता, संजय चौधरी
- गुड्डू गुप्ता, विनोद गुप्ता, पिंटू मंडल
- सुमित कुमार, अंकित कुमार और उनके साथ दर्जनों स्वयंसेवक।
VOB का नजरिया: आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
- सांस्कृतिक धरोहर: सुल्तानगंज की गलियों में बसी यह परंपरा हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करती है।
- युवा भागीदारी: ‘बजरंगबली युवा समिति’ जैसे संगठनों का सक्रिय होना यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और धर्म के प्रति सजग है।
- अनुशासन: हजारों की भीड़ के बावजूद शांतिपूर्ण ढंग से महाआरती का संपन्न होना भक्तों के अनुशासन और प्रशासन के सहयोग का प्रमाण है।
सुशासन और भक्ति का उत्सव
सुल्तानगंज के मूंछ वाले हनुमान मंदिर में रामनवमी का उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। अब सबकी नजरें कल होने वाले विशाल भंडारे पर टिकी हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस आयोजन की भव्यता और कल होने वाले भंडारे की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


