HIGHLIGHTS: ‘बिहार दिवस’ पर पर्यटन का महाकुंभ; एक ही छत के नीचे पुनौराधाम से बुद्ध स्तूप तक का सफर
- मुख्य आकर्षण: राजगीर का ‘ग्लास ब्रिज’ बना लोगों की पहली पसंद; 3D प्रतिकृति देख दंग रह गए सैलानी।
- उद्घाटन: पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया पवेलियन का आगाज; बोले— “यह पर्यटकों के लिए ‘वन-स्टॉप डेस्टिनेशन’ है।”
- हाई-टेक अनुभव: AR/VR डिवाइस और टच स्क्रीन कियोस्क के जरिए घर बैठे करें बिहार के दर्शनीय स्थलों की सैर।
- फूड कार्निवल: बिहार पर्यटन विकास निगम के 53 स्टॉल्स पर उमड़ी भीड़; लिट्टी-चोखा, खाजा और पुरुकिया का चखा स्वाद।
- सेल्फी क्रेज: बापू टावर और जू-सफारी के ‘सेल्फी पॉइंट्स’ पर युवाओं में मची होड़।
पटना | 22 मार्च, 2026
आज जब पूरा प्रदेश 114वें बिहार दिवस के रंग में रंगा है, पटना का गांधी मैदान ‘मिनी बिहार’ के रूप में जीवंत हो उठा है। पर्यटन विभाग ने इस बार तकनीक और परंपरा का ऐसा मेल पेश किया है कि लोग राजगीर जाए बिना ही ‘ग्लास ब्रिज’ पर चलने का रोमांच महसूस कर रहे हैं। पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने रविवार को इस भव्य पवेलियन का उद्घाटन किया, जहाँ बिहार की बदलती तस्वीर को 3D मॉडल और वर्चुअल रियलिटी (VR) के जरिए पेश किया गया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, यह पवेलियन केवल सूचना का केंद्र नहीं, बल्कि बिहार की नई ‘ब्रांडिंग’ का चमकता हुआ चेहरा बन गया है।
राजगीर का ‘कांच’ और वैशाली का ‘स्तूप’: एक ही छत के नीचे सारा बिहार
पवेलियन में प्रवेश करते ही आगंतुक सीधे राजगीर के ग्लास ब्रिज के सामने होते हैं। इसकी 3D प्रतिकृति को इस तरह सजाया गया है कि वह बिल्कुल असली अहसास देती है।
इसके अलावा पवेलियन में इन प्रमुख स्थलों को दर्शाया गया है:
- पुनौराधाम मंदिर (सीतामढ़ी): माता जानकी की जन्मभूमि की दिव्यता।
- बुद्ध सम्यक दर्शन स्तूप (वैशाली): शांति और ज्ञान का प्रतीक।
- बापू टावर (पटना): गांधीवादी मूल्यों की आधुनिक प्रस्तुति।
- जू और नेचर सफारी: राजगीर के जंगलों का रोमांचक अनुभव।
मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि इन प्रतिकृतियों का उद्देश्य बिहार के उन लोगों को पर्यटन स्थलों से रूबरू कराना है जो किसी कारणवश वहां नहीं जा पाए हैं। साथ ही, बिहार टूरिज्म पॉलिसी के बारे में भी यहाँ विस्तार से जानकारी दी जा रही है ताकि निवेश को बढ़ावा मिले।
53 स्टॉल्स और बिहारी स्वाद का तड़का: लिट्टी से खाजा तक की धूम
पर्यटन विभाग ने न केवल आंखों को सुकुन दिया, बल्कि जुबां का भी पूरा ख्याल रखा है। बिहार पर्यटन विकास निगम की ओर से लगाए गए 53 फूड स्टॉल्स पर सुबह से ही खाने-पीने के शौकीनों का जमावड़ा लगा रहा।
VOB स्वाद अलर्ट: समोसा-कचौड़ी की खुशबू और जलेबी की मिठास के बीच सिलाव के खाजा और पारंपरिक पुरुकिया (गुझिया) की सबसे ज्यादा मांग रही। लिट्टी-चोखा के स्टॉल पर तो ‘हाउसफुल’ जैसे हालात रहे।
VOB का नजरिया: क्या यह सिर्फ ‘प्रदर्शन’ है या ‘आमंत्रण’?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि पर्यटन विभाग का यह प्रयास ‘उन्नत बिहार’ की दिशा में एक सही कदम है।
- मार्केटिंग की नई सोच: AR/VR जैसी तकनीक का उपयोग यह बताता है कि बिहार पर्यटन अब ‘पुराने ढर्रे’ से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने को तैयार है।
- रोजगार के अवसर: 53 फूड स्टॉल्स न केवल स्वाद दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय खानपान को ‘ब्रांड’ बनाने और छोटे उद्यमियों को मंच देने का काम कर रहे हैं।
- कनेक्टिविटी: बापू टावर और बुद्ध स्तूप जैसी जगहों के बारे में जानकारी मिलने से ‘धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन’ को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
निष्कर्ष: सुशासन और सैर-सपाटे का अद्भुत संगम
114वें बिहार दिवस पर गांधी मैदान का यह पवेलियन यह साबित करता है कि बिहार अब केवल ‘इतिहास’ नहीं, बल्कि ‘भविष्य’ का भी पर्यटन केंद्र है। अगर आप भी राजगीर के रोमांच और मिथिला के स्वाद का एक साथ आनंद लेना चाहते हैं, तो अगले दो दिनों तक गांधी मैदान आपका इंतजार कर रहा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस शानदार आयोजन के लिए पर्यटन विभाग को बधाई देता है।


