द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर/मालदा (18 फरवरी 2026)
भारतीय रेल केवल पटरियों पर दौड़ती एक मशीन नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों को जोड़ने वाली जीवनरेखा है। इसी जीवनरेखा को सुरक्षित बनाने के लिए पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान “सतर्क नागरिक, सुरक्षित रेल” चलाकर सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंडल रेल प्रबंधक श्री मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पिछले 10 महीनों से चल रहे इस अभियान ने रेलवे सुरक्षा को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।
10 महीनों की मुहिम: आंकड़ों में सफलता
01 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच मालदा मंडल ने सुरक्षा मानकों को लेकर कड़ा रुख अपनाया और साथ ही जनता से संवाद भी साधा।
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अभियान की उपलब्धियां |
आंकड़े (अप्रैल ’25 – जनवरी ’26) |
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कुल जागरूकता कार्यक्रम |
432 |
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जागरूक किए गए नागरिक |
~10,000 |
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कवर किए गए स्कूल व गांव |
12 स्कूल और 80 गांव |
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अनावश्यक चेन पुलिंग (ACP) पर कार्रवाई |
1269 व्यक्ति |
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रेलवे एक्ट उल्लंघन में गिरफ्तारियां |
10110 व्यक्ति |
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कुल वसूला गया जुर्माना |
₹ 20,96,500/- |
सेल्फी और स्टंट नहीं, जिम्मेदारी दिखाएं युवा
अभियान के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और वाणिज्य विभाग की टीमों ने स्कूल-कॉलेजों और ट्रैक किनारे बसे गांवों में जाकर लोगों को आगाह किया।
- ह्यूमन रन ओवर: पटरियों पर अनाधिकृत रूप से चलना और चलती ट्रेन के पास सेल्फी लेना जानलेवा है। युवाओं को संदेश दिया गया कि यह साहस नहीं, बल्कि बेवकूफी है।
- कैटल रन ओवर: ट्रैक किनारे मवेशी चराने से न केवल पशुहानि होती है, बल्कि रेल दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
- दंडनीय अपराध: अलार्म चेन पुलिंग (ACP), पटरियों पर अतिक्रमण और ट्रेनों पर पत्थरबाजी करना गंभीर अपराध है, जिसके लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है।
मानव तस्करी के खिलाफ ‘अलर्ट’ रहने की अपील
मंडल सुरक्षा आयुक्त श्री असीम कुमार कुल्लू के पर्यवेक्षण में नागरिकों से अपील की गई कि यदि ट्रेन या स्टेशन परिसर में कोई बच्चा या महिला संदिग्ध अवस्था में दिखे, तो तुरंत RPF को सूचित करें। रेलवे सुरक्षा बल मानव तस्करी को रोकने के लिए ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ जैसे अभियानों के जरिए निरंतर सक्रिय है।
द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: आपकी सुरक्षा, आपके हाथ
मालदा मंडल द्वारा वसूला गया ₹20 लाख से अधिक का जुर्माना यह दर्शाता है कि नियमों को तोड़ने वालों के प्रति प्रशासन सख्त है। भागलपुर और साहिबगंज जैसे रेल खंडों पर अक्सर ट्रैक पार करने की खबरें आती हैं। नागरिकों को यह समझना होगा कि रेलवे ट्रैक कोई शॉर्टकट नहीं है। सुरक्षित यात्रा तभी संभव है जब प्रशासन की मुस्तैदी के साथ जनता का अनुशासन भी जुड़े।
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