लोकसभा में चुनाव सुधार को लेकर बुधवार को सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जहां चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव को लेकर सरकार पर संस्थाओं पर कब्जे का आरोप लगाया, वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कड़ा पलटवार किया और कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह निष्पक्ष है, जबकि बीजेपी किसी भी बहस से भागती नहीं।
राहुल गांधी का सवाल: “CJI को पैनल से क्यों हटाया गया?”
राहुल गांधी ने मंगलवार को सरकार से पूछा था—
“चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से CJI को क्यों हटाया गया? क्या हमें भारत के चीफ जस्टिस पर भरोसा नहीं है?”
उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयुक्तों को कार्यालय में लिए गए फैसलों पर दंड से सुरक्षा देकर सरकार उन्हें “पूरी तरह अपने नियंत्रण में” कर रही है।
अमित शाह का पलटवार: “विपक्ष हमें भाषण का क्रम नहीं सिखा सकता”
बुधवार को जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि लोकसभा में किस मुद्दे पर कब बोलना है, यह तय करने का अधिकार उन्हें है।
शाह ने कहा—
“हम बीजेपी और एनडीए वाले किसी चर्चा से नहीं भागते। 30 साल का अनुभव है, विपक्ष के नेता को मेरे भाषण का क्रम तय करने का अधिकार नहीं है।”
राहुल गांधी द्वारा “वोट चोरी” पर उनकी तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करने पर शाह ने कहा कि संसद का मंच अदालतों में चल रहे मामलों पर बहस के लिए नहीं है।
“सोनिया गांधी से जुड़े सवालों के जवाब अदालत में दिए जाएंगे, संसद में नहीं।”
“चुनाव आयोग निष्पक्ष है” — अमित शाह
गृहमंत्री ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि—
- मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी पूरी तरह चुनाव आयोग की है
- कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर नहीं रखा जा सकता
- अनुच्छेद 325 और 326 इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था करते हैं
शाह ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा—
“अगर मतदाता सूची भ्रष्ट है, तो फिर जिन नेताओं ने शपथ ली है, वे किस सूची से चुने गए? यह परंपरा पहले कांग्रेस तक सीमित थी, अब पूरा विपक्ष इसमें शामिल हो गया है।”
चुनाव सुधार पर संसद में तेज़ होती राजनीतिक टकराहट
राहुल गांधी के आरोप और अमित शाह के जवाब के बाद यह साफ है कि चुनाव सुधार, चुनाव आयोग की नियुक्ति और मतदाता सूची जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में संसद और सियासत दोनों में गर्मी बढ़ाने वाले हैं।


