पटना | 28 फरवरी, 2026: खरीफ सीजन के बाद अब बिहार सरकार रबी फसलों की खरीद (Procurement) के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। शुक्रवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सभा कक्ष में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें रबी विपणन मौसम 2026-27 के तहत गेहूं, दलहन और तेलहन की सरकारी खरीद के लिए रणनीति तैयार की गई। सचिव अभय कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का सीधा लाभ पहुँचाने पर जोर दिया गया।
खरीद का ‘डबल मॉडल’: DCP और PSS
सरकार इस बार दो अलग-अलग योजनाओं के तहत फसलों की खरीद करेगी, ताकि हर किसान को उसकी उपज का सही दाम मिल सके:
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योजना का नाम |
फसलें |
प्रबंधन एजेंसी |
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विकेन्द्रीकृत अधिप्राप्ति (DCP) |
गेहूं |
बिहार राज्य खाद्य निगम (BSFC) |
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प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) |
चना, मसूर, सरसों/राई |
नेफेड (NAFED) और NCCF |
तैयारियों के 5 प्रमुख स्तंभ (Key Focus Areas)
बैठक में सचिव अभय कुमार सिंह ने अधिप्राप्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की:
- पंजीकरण और सत्यापन: किसानों का निबंधन, आधार-सत्यापन और जमीन के दस्तावेजों की त्वरित जांच।
- क्रय केंद्रों की संख्या: अधिक से अधिक क्रय केंद्र (Purchase Centers) खोलना ताकि किसानों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
- लॉजिस्टिक और भंडारण: अनाज के रखरखाव के लिए भंडारण क्षमता और परिवहन (Logistics) की पुख्ता व्यवस्था।
- पारदर्शी तौल: केंद्रों पर आधुनिक तौल यंत्र और आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना।
- त्वरित भुगतान (DBT): खरीद के तुरंत बाद किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भुगतान।
प्रशासनिक तालमेल और कड़े निर्देश
बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह और खाद्य निगम के एमडी सुनील कुमार सहित नेफेड और एनसीसीएफ के अधिकारी भी मौजूद रहे। सचिव अभय कुमार ने सभी एजेंसियों को ‘समन्वय’ (Coordination) के साथ काम करने का निर्देश दिया ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह ‘किसान हितैषी’ होनी चाहिए।
VOB का नजरिया: क्या समय पर शुरू होगी खरीद?
रबी सीजन की फसलें अब कटाई के करीब हैं। ऐसे में सरकार की यह अग्रिम तैयारी स्वागत योग्य है। बिहार में अक्सर देखा गया है कि क्रय केंद्र देर से खुलने के कारण किसान बिचौलियों को सस्ते दाम पर अपनी फसल बेच देते हैं। अगर इस बार ‘समयबद्धता’ (Timeliness) का पालन होता है और मसूर व सरसों जैसी नकदी फसलों की खरीद ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ के तहत सुचारू रहती है, तो यह बिहार के किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


