पूर्णिया में भ्रष्टाचार पर निगरानी का भीषण प्रहार: 40 हजार घूस लेते राजस्व कर्मचारी लाल बाबू रजक गिरफ्तार, महिला सहयोगी रूमी कुण्डु भी पहुंची सलाखों के पीछे

पूर्णिया। बिहार में सुशासन के दावों के बीच सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार की दीमक को साफ करने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी है। पूर्णिया जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी की टीम ने शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पूर्णिया पूर्व प्रखंड के अंचल कार्यालय में तैनात राजस्व कर्मचारी (हल्का कर्मचारी) लाल बाबू रजक को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उसके काले कारनामों में बराबर की साझीदार उसकी निजी सहयोगी रूमी कुण्डु को भी दबोचा गया है। 24 घंटे के भीतर पूर्णिया में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जिसने पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। निगरानी के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में हुई इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने यह साबित कर दिया है कि मेज के नीचे से होने वाले लेन-देन पर अब खाकी की पैनी नजर है।

जमीन के खेल में 40 हजार का सौदा: सुरज सहनी की शिकायत पर एक्शन

​भ्रष्टाचार के इस खेल का शिकार गुलाबबाग हांसदा के निवासी सुरज सहनी हुए थे। सुरज सहनी अपने पिता स्व० सौदागर सहनी की भूमि से संबंधित एक मामले को सुलझाने के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। मामला ‘भूमि रोक’ (Land Block) से संबंधित था, जिसकी जांच कर प्रतिवेदन (रिपोर्ट) समर्पित करने की जिम्मेदारी राजस्व कर्मचारी लाल बाबू रजक के पास थी।

​लाल बाबू रजक ने इस सरकारी दायित्व को निभाने के लिए सुरज सहनी से मोटी रकम की मांग की। बार-बार मिन्नतें करने के बावजूद कर्मचारी बिना ‘नजराने’ के फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं था। थक-हारकर सुरज सहनी ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के कार्यालय में गुहार लगाई। ब्यूरो ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत गोपनीय तरीके से शिकायत का सत्यापन कराया। जब सत्यापन में यह पुष्टि हो गई कि लाल बाबू रजक वास्तव में रिश्वत की मांग कर रहा है, तब 16 अप्रैल को निगरानी थाना कांड संख्या-045/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और ट्रैप की योजना तैयार की गई।

अभिलेखागार में बिछाया गया जाल: महिला सहयोगी के साथ रंगे हाथों गिरफ्तारी

​शुक्रवार की दोपहर पूर्णिया पूर्व अंचल कार्यालय का माहौल सामान्य था, लेकिन अभिलेखागार (रिकॉर्ड रूम) के भीतर भ्रष्टाचार का एक गुप्त खेल चल रहा था। डीएसपी अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में निगरानी का धावा दल सादे लिबास में कार्यालय के आसपास तैनात था। जैसे ही सुरज सहनी ने केमिकल लगे हुए 40 हजार रुपये लाल बाबू रजक को थमाए, वैसे ही वहां मौजूद उसकी सहयोगी रूमी कुण्डु सक्रिय हो गई।

​निगरानी की टीम ने बिजली की रफ़्तार से अभिलेखागार में प्रवेश किया और दोनों को घूस की रकम के साथ दबोच लिया। लाल बाबू रजक और रूमी कुण्डु को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पकड़ी गई महिला रूमी कुण्डु, जो सदर थाना क्षेत्र के कप्तानपाड़ा की रहने वाली है, हल्का कार्यालय में लाल बाबू रजक के निजी एजेंट के रूप में काम करती थी। सरकारी दफ्तरों में अक्सर ऐसे ‘प्राइवेट सिंडिकेट’ सक्रिय रहते हैं जो सीधे तौर पर रिश्वत लेने से बचने के लिए कर्मचारियों का ढाल बनते हैं। निगरानी की इस कार्रवाई ने न केवल एक भ्रष्ट कर्मचारी को पकड़ा है, बल्कि उस बाहरी नेटवर्क को भी बेनकाब किया है जो अंचल कार्यालयों को लूट का अड्डा बना चुका है।

24 घंटे के भीतर ‘डबल अटैक’: पूर्णिया के भ्रष्ट अधिकारियों में दहशत

​पूर्णिया जिले के लिए पिछले 24 घंटे भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में ऐतिहासिक रहे हैं। गौरतलब है कि ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही शिक्षा विभाग के एक घूसखोर इंजीनियर भूषण प्रसाद को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। उस कार्रवाई की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि शुक्रवार को लाल बाबू रजक और उसकी सहयोगी का पकड़ा जाना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है।

​लगातार हो रही इन गिरफ्तारियों ने यह संदेश दे दिया है कि निगरानी की टीम अब शहर में ही डेरा डाले हुए है। पूर्णिया के विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारी अब किसी भी बाहरी व्यक्ति से बात करने या फाइल छूने में भी कतरा रहे हैं। निगरानी विभाग के सूत्रों का कहना है कि उनके पास कई अन्य विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी पुख्ता शिकायतें हैं और आने वाले दिनों में और भी कई बड़े ‘चेहरे’ बेनकाब हो सकते हैं।

निगरानी ब्यूरो का रिपोर्ट कार्ड: 2026 में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

​वर्ष 2026 में बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक युद्ध छेड़ रखा है। आज की कार्रवाई के साथ ही ब्यूरो ने इस वर्ष अब तक कुल 45 प्राथमिकी दर्ज की हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 45 कांडों में से 40 कांड सीधे तौर पर ट्रैप (रंगे हाथों गिरफ्तारी) से संबंधित हैं।

​आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक कुल 37 अभियुक्तों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों जेल भेजा जा चुका है। इन कार्रवाइयों के दौरान ब्यूरो ने अब तक कुल 12,81,000/- (बारह लाख इक्यासी हजार) रुपये की रिश्वत राशि बरामद की है। ये आंकड़े बताते हैं कि बिहार के छोटे और मध्यम स्तर के सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, लेकिन साथ ही यह निगरानी विभाग की बढ़ती कार्यकुशलता और जनता के बीच बढ़ते विश्वास का भी प्रमाण है।

अंचल कार्यालयों में बिचौलियों का राज और जनता का दर्द

​पूर्णिया पूर्व अंचल कार्यालय में हुई यह गिरफ्तारी उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहाँ आम आदमी अपनी जायज मांगों के लिए भी दफ्तरों की धूल फांकने को मजबूर है। दाखिल-खारिज हो, लगान रसीद काटना हो या भूमि रोक हटाना, हर छोटे काम के लिए हल्का कर्मचारियों ने ‘रेट कार्ड’ फिक्स कर रखा है। लाल बाबू रजक जैसे कर्मचारी सरकारी वेतन तो लेते ही हैं, लेकिन बिना रिश्वत के फाइल पर कलम तक नहीं चलाते।

​इस भ्रष्टाचार में रूमी कुण्डु जैसे ‘निजी सहायकों’ की भूमिका भी अत्यंत घातक है। ये लोग कार्यालयों में अनधिकृत रूप से बैठकर फाइलों का प्रबंधन करते हैं और रिश्वत की सौदेबाजी करते हैं। सुरज सहनी जैसे जागरूक नागरिक जब आगे आते हैं, तभी व्यवस्था की ये गंदगी साफ होती है। निगरानी विभाग ने पकड़े गए दोनों अभियुक्तों से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें जल्द ही माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, भागलपुर में पेश किया जाएगा।

निष्कर्ष: भ्रष्टाचार मुक्त बिहार की दिशा में बढ़ते कदम

​लाल बाबू रजक और उसकी सहयोगी की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र पर तमाचा है जो जनता की सेवा के बजाय अपनी जेब भरने को प्राथमिकता देता है। पूर्णिया पूर्व अंचल कार्यालय के अभिलेखागार से हुई यह बरामदगी यह भी सिखाती है कि भ्रष्टाचार चाहे कितनी भी गोपनीयता से किया जाए, वह कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता। अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी और उनकी टीम की इस तत्परता ने पूर्णिया की जनता में एक नई उम्मीद जगाई है।

​अब समय आ गया है कि सरकार अंचल कार्यालयों में बाहरी लोगों (बिचौलियों) के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए और फाइलों के निष्पादन की डिजिटल ट्रैकिंग को और सख्त करे। निगरानी विभाग की यह 40वीं सफल ट्रैप कार्रवाई बिहार के हर उस भ्रष्ट कर्मचारी के लिए चेतावनी है जो अपनी कुर्सी का सौदा कर रहा है। आने वाले दिनों में भागलपुर की निगरानी अदालत में होने वाली सुनवाई और ब्यूरो के अग्रतर अनुसंधान से इस रैकेट के कई और तार जुड़ने की उम्मीद है।

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