24 घंटे के भीतर पूर्णिया में भ्रष्टाचार पर निगरानी विभाग का ताबड़तोड़ एक्शन, इंजीनियर के बाद अब 40 हजार घूस लेते हल्का कर्मचारी गिरफ्तार

पूर्णिया। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा पूर्णिया में बीते 24 घंटों के भीतर हुई दो बड़ी गिरफ्तारियों से लगाया जा सकता है। पटना से सक्रिय हुई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (निगरानी विभाग) की टीम ने पूर्णिया जिले को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए ‘बैक-टू-बैक’ सर्जिकल स्ट्राइक की है। गुरुवार को शिक्षा विभाग के एक इंजीनियर को दबोचने के बाद, शुक्रवार को टीम ने पूर्णिया पूर्व प्रखंड के अंचल कार्यालय में सेंधमारी कर हल्का कर्मचारी लाल बाबू रजक को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। महज 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग विभागों के घूसखोरों पर हुए इस प्रहार ने पूरे जिले के सरकारी अमले में दहशत पैदा कर दी है। निगरानी के डीएसपी अमरेंद्र कुमार विद्यार्थी के नेतृत्व में हुई इन कार्रवाइयों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में अब ‘नजराना’ लेकर काम करने वाले लोकसेवकों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। 17 अप्रैल की दोपहर को हुई इस ताज़ा गिरफ्तारी ने अंचल कार्यालयों में चल रहे बिचौलियों के ‘प्राइवेट सिंडिकेट’ का भी सनसनीखेज खुलासा किया है।

निगरानी का ‘हंटर’: 24 घंटे, दो विभाग और दो बड़ी गिरफ्तारियां

​भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पूर्णिया के लिए पिछले 24 घंटे ऐतिहासिक रहे हैं। निगरानी विभाग की टीम ने जिस रफ़्तार और गोपनीयता के साथ काम किया, उसने भ्रष्ट अधिकारियों को संभलने तक का मौका नहीं दिया।

  • गुरुवार की कार्रवाई: सबसे पहले गुरुवार को निगरानी की टीम ने शिक्षा विभाग के भवन निर्माण प्रमंडल में तैनात इंजीनियर भूषण प्रसाद को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद जिले में चर्चा शुरू ही हुई थी कि शुक्रवार को टीम ने इससे भी बड़ा धमाका कर दिया।
  • शुक्रवार की कार्रवाई: ठीक 24 घंटे के अंतराल में, टीम ने पूर्णिया पूर्व अंचल के हल्का कर्मचारी लाल बाबू रजक पर शिकंजा कसा। इस बार रिश्वत की रकम 40 हजार रुपये थी।

​महज एक दिन के भीतर दो अलग-अलग क्षेत्रों (शिक्षा और राजस्व) में हुई ये गिरफ्तारियां यह साबित करती हैं कि भ्रष्टाचार किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी कि निगरानी विभाग अब हर विभाग पर पैनी नजर रख रहा है।

40 हजार का ‘रिश्वत कांड’: जमीन के बदले मांगी थी मोटी रकम

​शुक्रवार को हुई गिरफ्तारी की पटकथा एक जमीन के विवाद से शुरू हुई थी। पीड़ित व्यक्ति अपनी जमीन के दाखिल-खारिज और रसीद निर्गत कराने के लिए पूर्णिया पूर्व अंचल के चक्कर काट रहा था। हल्का कर्मचारी लाल बाबू रजक ने इस सरकारी काम को करने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की थी। पीड़ित ने जब अपनी असमर्थता जताई, तो काफी सौदेबाजी के बाद मामला 40 हजार रुपये पर जाकर टिका।

​पीड़ित व्यक्ति ने इस अन्याय के सामने झुकने के बजाय पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को सूचित करना बेहतर समझा। निगरानी विभाग ने गुप्त तरीके से मामले का सत्यापन कराया और पाया कि शिकायत पूरी तरह सही है। इसके बाद पटना मुख्यालय में लाल बाबू रजक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई और एक विशेष धावा दल का गठन किया गया। डीएसपी अमरेंद्र कुमार विद्यार्थी अपनी टीम के साथ पूर्णिया पहुँचे और शुक्रवार को उस वक्त का इंतजार करने लगे जब रिश्वत का लेन-देन होना था।

पर्स में छिपाया था पाप: महिला सहयोगी की ‘स्मार्ट’ चालबाजी नाकाम

​लाल बाबू रजक केवल भ्रष्ट ही नहीं, बल्कि बेहद शातिर भी था। उसने खुद को सुरक्षित रखने के लिए भ्रष्टाचार का एक नया ‘फिल्टर’ तैयार कर रखा था। वह कभी भी रिश्वत की रकम सीधे अपने हाथों में नहीं लेता था। शुक्रवार को जब पीड़ित व्यक्ति पैसे लेकर पहुँचा, तो लाल बाबू रजक ने वहां मौजूद अपनी एक निजी महिला सहयोगी की ओर इशारा कर दिया। यह महिला आधिकारिक रूप से सरकारी कर्मचारी नहीं थी, बल्कि हल्का ऑफिस में लाल बाबू रजक के लिए निजी तौर पर काम करती थी।

​जैसे ही पीड़ित ने 40 हजार रुपये उस महिला को सौंपे, उसने उन नोटों को अपने पर्स के भीतर सुरक्षित रख लिया। इसी बीच, कमरे के बाहर मुस्तैद निगरानी की टीम ने अचानक धावा बोल दिया। पहले तो लाल बाबू रजक ने निर्दोष होने का नाटक किया, लेकिन जब टीम ने महिला सहयोगी के पर्स की तलाशी ली, तो वहां से केमिकल लगे हुए नोट बरामद हो गए। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद कर्मचारी और उसकी सहयोगी के पास बचाव का कोई रास्ता नहीं बचा। निगरानी ने दोनों को हिरासत में ले लिया।

अंचल कार्यालयों में ‘प्राइवेट सिंडिकेट’ का भंडाफोड़

​इस गिरफ्तारी ने बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के भीतर पल रहे एक खतरनाक ‘प्राइवेट सिस्टम’ को उजागर किया है। पूर्णिया पूर्व अंचल में लाल बाबू रजक के साथ पकड़ी गई महिला इस बात का प्रमाण है कि सरकारी कर्मचारी अब बिचौलियों को अपने दफ्तर के भीतर ही ‘स्टाफ’ के रूप में नियुक्त कर रहे हैं। ये निजी सहायक न केवल रिश्वत की सौदेबाजी करते हैं, बल्कि सरकारी फाइलों और दस्तावेजों तक भी उनकी अनधिकृत पहुँच होती है।

​निगरानी के डीएसपी अमरेंद्र कुमार विद्यार्थी ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि यह महिला हल्का कर्मचारी के हर काम में निजी तौर पर सहयोगी थी। घूस के पैसों को सीधे अपने पर्स में रखना यह दर्शाता है कि यह एक सोची-समझी कार्यप्रणाली थी ताकि पकड़े जाने पर सरकारी कर्मचारी अपने पास से पैसा न मिलने की दलील दे सके। लेकिन निगरानी की टीम ने इस ‘स्मार्ट करप्शन’ के मॉडल को ध्वस्त कर दिया है। अब यह जांच का विषय है कि इस अंचल में ऐसे कितने और ‘निजी कर्मचारी’ सक्रिय हैं।

24 घंटे का खौफ: सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा

​पूर्णिया में 24 घंटे के भीतर हुई इन दो गिरफ्तारियों का असर शहर के अन्य सरकारी कार्यालयों पर भी साफ देखा जा रहा है। गुरुवार को इंजीनियर भूषण प्रसाद की गिरफ्तारी और शुक्रवार को लाल बाबू रजक के रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद कई ‘दागी’ अधिकारी और कर्मचारी अपने दफ्तरों से गायब नजर आए। जो कर्मचारी कल तक मेज के नीचे से पैसे मांगने में नहीं हिचकते थे, वे अब किसी भी अनजान व्यक्ति को शक की निगाह से देख रहे हैं।

​सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी ‘सीरियल’ कार्रवाई की बहुत जरूरत थी। लगातार हो रही गिरफ्तारियों से यह संदेश गया है कि निगरानी की टीम अब शहर में ही डेरा डाले हुए है। पूर्णिया पूर्व अंचल कार्यालय, जहाँ भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं, वहां आज इस कार्रवाई के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अब इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि अगला नंबर किसका होगा।

निगरानी डीएसपी का संदेश: ‘भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं’

​कार्रवाई के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए डीएसपी अमरेंद्र कुमार विद्यार्थी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह अभियान और भी तेज होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए निगरानी विभाग प्रतिबद्ध है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे रिश्वतखोरों से डरने के बजाय उनकी शिकायत करें।

​डीएसपी ने बताया कि 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग विभागों (शिक्षा और राजस्व) के भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीम के समन्वय और पीड़ितों के साहस ने इसे सफल बनाया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में और भी कई ‘मछलियां’ जाल में फँस सकती हैं। निगरानी विभाग अब इन गिरफ्तार आरोपितों की चल-अचल संपत्ति की भी जांच करने की तैयारी में है, ताकि यह पता चल सके कि इन्होंने जनता के पैसों से कितनी अवैध संपत्ति जमा की है।

निष्कर्ष: सुशासन का असली पैमाना

​17 अप्रैल 2026 की यह दोपहर पूर्णिया के लिए न्याय और पारदर्शिता की जीत का प्रतीक है। 24 घंटे के भीतर इंजीनियर भूषण प्रसाद और हल्का कर्मचारी लाल बाबू रजक की गिरफ्तारी यह बताती है कि भ्रष्टाचार चाहे व्यवस्था की परतों के भीतर कितना भी गहरा क्यों न छिपा हो, उसे खोदकर निकाला जा सकता है। हल्का कर्मचारी द्वारा एक निजी महिला सहयोगी का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि अपराधी अब तकनीक और तरीके बदल रहे हैं, लेकिन निगरानी विभाग की सतर्कता उनसे दो कदम आगे है।

​पूर्णिया के अंचल कार्यालयों में व्याप्त ‘दीमक’ को साफ करने के लिए ऐसी ही निरंतर और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है। इन 24 घंटों ने न केवल दो घूसखोरों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है, बल्कि उन हजारों आम नागरिकों के भीतर विश्वास जगाया है जो अपनी जायज मांगों के लिए इन दफ्तरों की धूल फांकते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन कार्यालयों के ‘प्राइवेट सिस्टम’ को खत्म करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

  • ये भी पढ़े..

    कटिहार रेलवे स्टेशन पर बवाल: राजधानी एक्सप्रेस के आगे ट्रैक पर उतरे परीक्षार्थी, सरकार और रेलवे के खिलाफ नारेबाजी

    Share Add as a preferred…

    विक्रमशिला पुल पर मालवाहक वाहनों के वायरल वीडियो में जांच के बाद पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

    Share Add as a preferred…