पूर्णिया: हैवानियत की हदें पार; युवती की आवाज दबाने के लिए मुंह में भरा ‘फेविकॉल’; हिम्मत ने बचाई आबरू

पूर्णिया | 23 फरवरी, 2026: बिहार के पूर्णिया जिले से रूह कंपा देने वाली एक वारदात सामने आई है, जहाँ एक सनकी युवक ने अपनी हवस मिटाने के लिए क्रूरता की सारी सीमाएं लांघ दीं। आरोपी ने युवती को चीखने से रोकने के लिए उसके मुंह में फेविकॉल (गोंद) तक डाल दिया। हालांकि, पीड़िता के अदम्य साहस ने न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि आरोपी को सलाखों के पीछे भी पहुँचा दिया।

खौफनाक रात की पूरी कहानी

​घटना 20 फरवरी की रात की है। 21 वर्षीय पीड़िता अपने घर में सो रही थी, तभी गांव का ही कैलाश राय (20 वर्ष) दबे पांव उसके कमरे में घुस आया।

  • साजिश: आरोपी ने युवती के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की।
  • क्रूरता: जब युवती ने विरोध किया और शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने एक भयावह योजना के तहत उसके मुंह में फेविकॉल उड़ेल दिया ताकि उसकी आवाज गले में ही दब जाए और कोई मदद के लिए न आ सके।

बहादुरी: जब शिकारी खुद बन गया ‘शिकार’

​ऐसी जानलेवा और दम घोंटने वाली स्थिति में भी युवती ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर आरोपी को जोर का धक्का दिया।

  1. सूझबूझ: धक्का लगते ही आरोपी लड़खड़ाया, जिसका फायदा उठाकर युवती तुरंत कमरे से बाहर भागी।
  2. कैद: युवती ने बाहर निकलते ही कमरे की कुंडी बाहर से लगा दी और आरोपी को अंदर ही कैद कर दिया।
  3. मदद: इसके बाद वह बदहवास हालत में बाहर की ओर भागी। उसकी चीखें (जो फेविकॉल की वजह से दब रही थीं) और भागने की आवाज सुनकर ग्रामीण इकट्ठा हो गए।

ग्रामीणों का आक्रोश और पुलिस की कार्रवाई

​कमरे में बंद आरोपी को ग्रामीणों ने रंगे हाथों दबोच लिया। आक्रोशित लोगों ने आरोपी कैलाश राय की जमकर धुनाई की और फिर पुलिस को सूचना दी।

पुलिसिया कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

    • गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आरोपी को हिरासत में लिया और अब उसे जेल भेज दिया गया है।
    • पुष्टि: मेडिकल जांच और प्रारंभिक साक्ष्यों में दुष्कर्म के प्रयास और मारपीट की पुष्टि हुई है।
    • कानूनी प्रक्रिया: पुलिस अब इस मामले को ‘स्पीडी ट्रायल’ के जरिए कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है ताकि आरोपी को कठोरतम सजा मिल सके।

पीड़िता का संकल्प: “मैं इस लड़ाई को अंतिम अंजाम तक ले जाऊंगी। मेरी हिम्मत उन सभी अपराधियों के लिए एक संदेश है जो महिलाओं को कमजोर समझते हैं।”

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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