पूर्णिया में रहस्यमयी मौतों से हड़कंप: आंध्र प्रदेश से लौटे चार श्रमिकों की मौत, कई अन्य जिंदगी और मौत से जूझ रहे

पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड स्थित गुरही पंचायत में आंध्र प्रदेश से लौटे श्रमिकों की लगातार हो रही मौतों ने पूरे इलाके में दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। पत्थर घिसाई फैक्ट्री में काम करने वाले चार श्रमिकों की एक-एक कर मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से अधिक मजदूर गंभीर रूप से बीमार हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री में पत्थर की धूल के बीच काम करने के कारण मजदूर गंभीर फेफड़ों की बीमारी की चपेट में आ गए।

घटना ने न केवल प्रभावित परिवारों को झकझोर दिया है, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा और दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चार श्रमिकों की हो चुकी है मौत

जानकारी के अनुसार कसबा प्रखंड के जियनगंज गांव और आसपास के क्षेत्रों से करीब एक दर्जन मजदूर रोजगार के लिए आंध्र प्रदेश गए थे। वहां एक फैक्ट्री में उनसे पत्थर घिसाई का काम कराया जाता था।

बीमारी की हालत में घर लौटने के बाद अब तक चार श्रमिकों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को 22 वर्षीय मोहम्मद मसद की मौत हो गई। उनके भाई असद आलम ने बताया कि बीमारी के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया।

इससे पहले जियनगंज गांव निवासी मोहम्मद मुस्तफा (50 वर्ष), तारानगर के कुंदन कुमार (25 वर्ष) तथा सर्रा बथनाह के अरविंद ऋषि (18 वर्ष) की भी मौत हो चुकी है।

कई मजदूरों की हालत नाजुक

चार मौतों के बाद भी संकट टला नहीं है। गांव के कई अन्य श्रमिक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

परिजनों के अनुसार जियनगंज गांव के मोहम्मद राजी (22 वर्ष) की हालत बेहद गंभीर है। चिकित्सकों ने लगभग जवाब दे दिया है और वह घर पर ही जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

इसी गांव के 23 वर्षीय दानिश का इलाज पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में चल रहा है। इसके अलावा संतोष ऋषि के पुत्र और स्वर्गीय जक्कों ऋषि के पुत्र की स्थिति भी गंभीर बताई जा रही है। वहीं लालो ऋषि, अशोक ऋषि और अजय ऋषि समेत कई अन्य श्रमिकों का इलाज जारी है।

पत्थर की धूल बनी मौत की वजह?

स्थानीय लोगों और चिकित्सकों को आशंका है कि पत्थर घिसाई के दौरान निकलने वाली महीन धूल मजदूरों के फेफड़ों में जमा हो गई, जिससे उन्हें गंभीर बीमारी हो गई।

सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कनौजिया ने बताया कि पत्थर की डस्ट फेफड़ों और श्वास नली को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। लगातार धूल के संपर्क में रहने वाले लोगों को कई प्रकार की फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं।

हालांकि उन्होंने कहा कि प्रभावित श्रमिकों को वास्तव में कौन-सी बीमारी हुई है, इसका स्पष्ट पता चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

ठेकेदार पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों के अनुसार जियनगंज गांव का एक ठेकेदार जुनेद गुरही पंचायत के करीब एक दर्जन मजदूरों को आंध्र प्रदेश लेकर गया था। वहां उन्हें पत्थर घिसाई के काम में लगाया गया।

मृतकों के परिजनों ने ठेकेदार और फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मजदूरों की तबीयत खराब होने के बावजूद उनसे लगातार काम कराया जाता था।

परिजनों का आरोप है कि यदि कोई मजदूर काम करने में असमर्थ होता था तो उसे कमरे में बंद कर प्रताड़ित किया जाता था और तब तक दबाव बनाया जाता था जब तक वह दोबारा काम शुरू न कर दे।

बीमारी बढ़ने पर भेज दिया गया घर

ग्रामीणों का आरोप है कि जब श्रमिकों की स्थिति ज्यादा खराब हो गई और वे काम करने में असमर्थ हो गए, तब फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें वापस उनके गांव भेज दिया।

घर लौटने के बाद भी उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती रही और देखते ही देखते कई लोगों की मौत हो गई। अब गांव के अन्य श्रमिक भी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

ग्रामीणों ने की गिरफ्तारी की मांग

लगातार हो रही मौतों के बाद गुरही पंचायत और आसपास के गांवों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने आरोपित ठेकेदार की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मजदूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता तो इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। प्रभावित परिवारों ने सरकार से आर्थिक सहायता और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।

पुलिस और प्रशासन की नजर

पूर्णिया की पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत ने बताया कि श्रमिक की मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जानकारी ली है। मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया है।

उन्होंने कहा कि परिजनों की ओर से आवेदन मिलने के बाद मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

फिलहाल पूरे इलाके में भय और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि बीमार श्रमिकों का समुचित इलाज नहीं हुआ तो मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। अब सभी की निगाहें मेडिकल जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जो इस रहस्यमयी बीमारी और मौतों की असली वजह सामने ला सकती है।

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