
भागलपुर, 06 मई 2026 : विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सड़क संपर्क बाधित होने से दैनिक यात्रियों, छात्रों, मरीजों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब रेलवे को सबसे प्रभावी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। इसी को लेकर भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त अवनीश कुमार सिंह ने मालदा रेल मंडल को पत्र भेजकर प्रतिदिन दो नई ट्रेनें चलाने की मांग की है।
प्रमंडलीय आयुक्त ने न केवल डीआरएम को पत्र भेजा बल्कि फोन पर भी उनसे बातचीत कर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला पुल के टूटने के बाद भागलपुर, बांका, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और सीमांचल क्षेत्र के लोगों का सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए ट्रेन सेवा सबसे कारगर विकल्प साबित हो सकती है।
डीआरएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि तीन मई की देर रात भागलपुर स्थित विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। बड़ी संख्या में लोग नाव और स्टीमर के सहारे गंगा पार करने को मजबूर हैं। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा घाटों पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में रेलवे सेवा शुरू होने से लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
प्रस्ताव में मांग की गई है कि प्रतिदिन सुबह सात बजे और शाम पांच बजे सहरसा, सिलीगुड़ी या जलपाईगुड़ी से भागलपुर के लिए 15 कोच वाली ट्रेन चलाई जाए। यह ट्रेन नवगछिया, बिहपुर, नारायणपुर, मानसी और मुंगेर होते हुए भागलपुर पहुंचे। इससे कोसी और सीमांचल क्षेत्र के हजारों यात्रियों को सीधी और सुरक्षित यात्रा सुविधा मिल सकेगी।
मालदा रेल मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्हें प्रमंडलीय आयुक्त का पत्र मंगलवार शाम को प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि भागलपुर में उत्पन्न आवागमन संकट को लेकर उनसे विस्तार से चर्चा भी हुई है। डीआरएम ने बताया कि उन्होंने एडीआरएम को निर्देश दिया है कि भागलपुर से मुंगेर होते हुए खगड़िया, बिहपुर, नवगछिया और आगे तक ट्रेन संचालन की संभावनाओं को लेकर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि इस मामले में पूर्व मध्य रेलवे सहित अन्य रेलवे जोनों से भी समन्वय स्थापित करना होगा, क्योंकि प्रस्तावित रूट विभिन्न जोनों से होकर गुजरता है। रेलवे सभी तकनीकी, परिचालन और संसाधन संबंधी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है ताकि जल्द से जल्द कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो गई है। छात्रों को कॉलेज और कोचिंग पहुंचने में परेशानी हो रही है, मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं और नौकरीपेशा लोगों को समय पर अपने कार्यस्थल तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। नाव सेवा शुरू होने के बावजूद यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में ट्रेन सेवा लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत साबित हो सकती है।
व्यापारिक गतिविधियों पर भी पुल बंद होने का असर साफ दिखाई देने लगा है। भागलपुर और सीमांचल क्षेत्र के बीच फल, सब्जी, दूध, कपड़ा और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। व्यापारी वर्ग का कहना है कि यदि ट्रेन सेवा शुरू होती है तो माल ढुलाई में भी सहूलियत मिलेगी और बाजार की स्थिति सामान्य होने लगेगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही विक्रमशिला सेतु का हवाई सर्वेक्षण कर चुके हैं और अधिकारियों को तीन महीने के भीतर पुल को पुनर्स्थापित करने का निर्देश दे चुके हैं। वहीं जिला प्रशासन घाटों पर नाव सेवा, मेडिकल टीम, एंबुलेंस, पुलिस बल और राहत शिविर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फिजिबिलिटी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी। यदि सभी तकनीकी और परिचालन पहलू अनुकूल रहे तो विशेष ट्रेन सेवा शुरू करने पर जल्द फैसला लिया जा सकता है। रेलवे यह भी देख रहा है कि मौजूदा ट्रेनों के समय और रूट में बदलाव कर यात्रियों को अस्थायी राहत कैसे दी जा सकती है।
फिलहाल भागलपुर और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें रेलवे पर टिकी हुई हैं। लोगों को विश्वास है कि जल्द ही नई ट्रेन सेवा शुरू होगी और विक्रमशिला सेतु संकट के बीच उन्हें राहत मिलेगी। रेलवे की यह पहल न केवल यात्रियों की समस्या को कम करेगी बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी फिर से गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


