पटना, 19 अगस्त 2025: राज्य के सभी जिला कृषि पदाधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव कृषि विभाग पंकज कुमार ने खरीफ 2025 के लिए उर्वरक की उपलब्धता, कालाबाजारी और छापामारी की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया। बैठक में बताया गया कि बिहार में इस मौसम के लिए 10.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.20 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.50 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.50 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 0.75 लाख मीट्रिक टन एसएसपी की आवश्यकता है।
वर्तमान में राज्य के किसी भी जिले में उर्वरक की कमी नहीं है। 19 अगस्त 2025 तक राज्य में 1.76 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.00 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 1.91 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.54 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 0.92 लाख मीट्रिक टन एसएसपी पर्याप्त स्टॉक में उपलब्ध हैं।
प्रधान सचिव ने कहा कि कालाबाजारी और अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। खरीफ 2025 के दौरान अब तक 34 उर्वरक प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और 214 प्रतिष्ठानों का प्राधिकार पत्र रद्द किया गया है। किसानों को समय पर उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जिला एवं प्रखंड स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाए। प्रखंडवार उप-आवंटन वास्तविक आवश्यकता और स्थानीय आच्छादन के आधार पर किया जाए। प्रतिष्ठानों में पीओएस मशीन पर स्टॉक और वास्तविक उपलब्धता का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी अनियमितता पर कठोर कार्रवाई की जाए।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में विशेष निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं, जिसमें सशस्त्र सीमा बल के साथ समन्वय कर उर्वरक की अवैध तस्करी पर रोक लगाने पर बल दिया गया।
प्रधान सचिव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और विभागीय निगरानी, छापामारी और कठोर कार्रवाई के माध्यम से खरीफ 2025 के दौरान सभी किसानों को समय पर पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा।


