प्रिंस यादव मौत मामले में बढ़ा विवाद, रौशन आनंद ने खान सर पर लगाए गंभीर आरोप, FIR नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

पटना, 18 जून 2026। प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है और पटना में इसको लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के संचालक रौशन आनंद ने खान ग्लोबल स्टडीज के संस्थापक फैजल खान उर्फ खान सर समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। रौशन आनंद ने स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

इस मामले ने न केवल शैक्षणिक संस्थानों के बीच चल रहे तनाव को उजागर किया है, बल्कि पुलिस की भूमिका और जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों, स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में भी यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

प्रिंस यादव की मौत के बाद तेज हुई कानूनी लड़ाई

प्रिंस यादव की मौत के बाद उनके परिजनों और करीबी लोगों के बीच गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। रौशन आनंद, जो खुद प्रिंस यादव के बड़े भाई हैं, लगातार इस मामले को साजिश से जोड़ रहे हैं। उनका दावा है कि यह केवल एक सामान्य मौत नहीं बल्कि सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा है।

रौशन आनंद का कहना है कि उनके भाई की मौत के पीछे कई परतें हैं, जिन्हें पुलिस गंभीरता से नहीं देख रही। उनका आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई से बच रही है।

उन्होंने कहा कि परिवार न्याय चाहता है और जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

कदमकुआं थाने में दर्ज कराया लिखित आवेदन

रौशन आनंद ने कदमकुआं थाना पहुंचकर विस्तृत लिखित शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने फैजल खान उर्फ खान सर, डॉ. रामाशंकर प्रसाद, कन्हैया कुमार सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है।

आवेदन में उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ पहले झूठा मामला बनाकर जेल भेजा गया। साथ ही जेल के भीतर भी उनकी जान को खतरा था। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम उन्हें और उनके परिवार को मानसिक तथा सामाजिक रूप से तोड़ने की कोशिश का हिस्सा था।

उनका कहना है कि यदि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

पोस्टर विवाद से शुरू हुआ तनाव

रौशन आनंद के अनुसार इस विवाद की शुरुआत 2 जून 2026 की रात हुई। उनका कहना है कि मुसल्लहपुर हाट स्थित उनके कोचिंग संस्थान और पास के दूसरे संस्थान के स्टाफ के बीच पोस्टर हटाने को लेकर विवाद हुआ था।

इस विवाद के दौरान मारपीट की घटना भी सामने आई, जिसमें एक गार्ड घायल हो गया था। हालांकि रौशन आनंद का दावा है कि उस समय न तो वे स्वयं मौजूद थे और न ही उनके भाई प्रिंस यादव घटनास्थल पर थे।

उनका कहना है कि घटना के बाद योजनाबद्ध तरीके से उन्हें फंसाया गया और पूरी कहानी को उनके खिलाफ मोड़ दिया गया। इसी बिंदु को आधार बनाकर वे आपराधिक साजिश का आरोप लगा रहे हैं।

जेल से रिहाई के बाद सीधे थाने पहुंचे

रौशन आनंद ने बताया कि वे 15 जून को जेल से रिहा हुए। जेल से निकलने के बाद वे सीधे अपने पैतृक गांव पहुंचे, जहां उन्होंने अपने भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

परिवार के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद वे पटना लौटे और सीधे कदमकुआं थाना पहुंचे। उनका कहना है कि उन्होंने न्याय की उम्मीद से पुलिस को आवेदन दिया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

उनका आरोप है कि पुलिस ने आवेदन लेने के बावजूद मामले में एफआईआर दर्ज करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

थाना परिसर में धरना और भावुक अपील

बुधवार देर शाम रौशन आनंद अपने वकील और समर्थकों के साथ थाना परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने खान सर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग दोहराई। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें करीब पांच घंटे तक थाने में बैठाए रखा लेकिन मामला दर्ज नहीं किया।

इससे नाराज होकर उन्होंने थाना परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान उनका भावुक पक्ष भी सामने आया। उन्होंने कहा कि प्रिंस यादव केवल उनके भाई नहीं थे बल्कि परिवार की उम्मीदों का केंद्र थे।

रौशन आनंद ने कहा कि उनके भाई की मौत ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि न्याय नहीं मिला तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करेगा।

पुलिस पर दबाव में काम करने का आरोप

रौशन आनंद ने पटना पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से डर रही है।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारी अनौपचारिक बातचीत में “ऊपर से दबाव” की बात कह रहे हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

रौशन आनंद के वकील ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब शिकायत उनके खिलाफ थी, तब कार्रवाई बहुत तेजी से हुई। लेकिन अब जब वे स्वयं शिकायतकर्ता हैं, तब एफआईआर दर्ज करने में देरी हो रही है।

उनका कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि एक पक्ष के लिए त्वरित कार्रवाई संभव है, तो दूसरे पक्ष की शिकायत पर भी समान गंभीरता दिखाई जानी चाहिए।

छात्रों ने किया समर्थन

थाना परिसर में मौजूद छात्रों ने भी रौशन आनंद के समर्थन में नारेबाजी की। बड़ी संख्या में छात्रों ने उनके पक्ष में आवाज उठाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।

छात्रों ने कहा कि यदि मामले की सही जांच नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन का हिस्सा बनेंगे। कई छात्रों ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर भी नाराजगी जताई।

शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों के बीच यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

CBI जांच की मांग और बढ़ा दबाव

रौशन आनंद ने पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच संभव नहीं दिख रही, इसलिए स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने जदयू नेता संजय झा से भी हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की अपील की है। इससे यह मामला अब शैक्षणिक विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।

फिलहाल सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि तय समय तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, तो पटना में बड़े प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रिंस यादव मौत मामला अब केवल एक पारिवारिक दुख की कहानी नहीं रह गया, बल्कि यह न्याय, पुलिस कार्रवाई और संस्थागत जवाबदेही का बड़ा प्रश्न बन चुका है।

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