प्रधानमंत्री मोदी ने शारदा सिन्हा के पुत्र को पत्र लिख कर उनके निधन पर किया शोक व्यक्त

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतिष्ठित लोक गायिका शारदा सिन्हा के पुत्र अंशुमन सिन्हा को पत्र लिख कर उनके निधन पर शोक व्यक्त किया तथा संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। अंशुमान सिन्हा ने मंगलवार को अपनी दिवंगत मां के एक्स हैंडल पर प्रधानमंत्री की ओर से प्राप्त पत्र की प्रति साझा करते हुए कहा कि पीएम मोदी का शोक संदेश प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि आज मां द्वारा किए गए पुनीत सांस्कृतिक योगदान का यथोचित सम्मान सहित भावपूर्ण शब्दावलियों में प्रधानमंत्री ने शोक संदेश भेजा है, साक्षी बन हम परिजन अभिभूत हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने शारदा सिन्हा के पुत्र को पत्र लिख कर उनके निधन पर किया शोक व्यक्त

प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में लिखा-मेरी संवेदनाएं आपके परिवार और प्रशंसकों के साथ

प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में लिखा कि आपकी माता शारदा सिन्हा के निधन से अत्यंत दुःख हुआ। इस मुश्किल समय में मेरी संवेदनाएं आपके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। लोक परंपरा और जीवन के संस्कारों से जुड़े अपने गीतों से शारदा सिन्हा ने हमारी संस्कृति को समृद्ध किया। मैथिली और भोजपुरी में अपनी सहज और खनकती आवाज में गाए लोकगीतों से उन्होंने जन-जन के हृदय को छुआ।

शारदा सिन्हा की आवाज के जादू ने अनगिनत संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया

उन्होंने लिखा कि लोकगीतों के अलावा फिल्मों में भी शारदा सिन्हा की आवाज के जादू ने अनगिनत संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया। उन्हें पद्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान मिले। संगीत से जुड़े युवाओं को उनका अमूल्य मार्गदर्शन मिलता रहा।

उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी परंपरा से जोड़ते रहेंगे

पीएम मोदी ने लिखा कि आस्था के महापर्व छठ से जुड़े उनके गीत तो मानो इस महापर्व का अभिन्न अंग बन गये हैं। भगवान भास्कर और छठी मैया को समर्पित उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी परंपरा से जोड़ते रहेंगे। उन्होंने लिखा कि बिहार कोकिला की आधी सदी से भी लंबी संगीत की साधना कला जगत की एक अनमोल धरोहर है। उनका निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत लोक गायिका से अपनी मुलाकातों को याद किया

प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत लोक गायिका से अपनी मुलाकातों को याद करते हुए लिखा कि सहज और सरल स्वभाव की धनी शारदा सिन्हा के साथ हुई स्नेहपूर्ण भेंट उन्हें आज भी स्मरण है। आज वह सशरीर इस संसार में नहीं हैं, पर उनके द्वारा दी गई शिक्षा, संस्कार और जीवन मूल्य परिजनों के साथ हमेशा बने रहेंगे।

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