भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन की नियुक्ति के साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जेपी नड्डा के बाद नितिन नवीन के नाम पर गंभीर मंथन चल रहा है और 2026 की शुरुआत में होने वाले भाजपा अध्यक्ष चुनाव में उनकी ताजपोशी के प्रबल संकेत मिल रहे हैं।
यदि नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो वे उम्र के लिहाज से अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और अमित शाह जैसे दिग्गज नेताओं की विशेष श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। भाजपा–जनसंघ के इतिहास में बहुत कम ऐसे नेता रहे हैं, जिन्हें कम उम्र में शीर्ष संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई हो।
जनसंघ से भाजपा तक: युवा अध्यक्षों की सीमित परंपरा
भारतीय जनसंघ और भाजपा को मिलाकर अब तक कुल 21 नेता पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं। जनसंघ की स्थापना 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी, जो 1977 में जनता पार्टी में विलय के बाद 1980 में भाजपा के रूप में पुनर्गठित हुई।
इस लंबे सफर में अब तक केवल 5 नेता ऐसे रहे हैं, जो पहली बार अध्यक्ष बनते समय 50 वर्ष से कम उम्र के थे—
- अटल बिहारी वाजपेयी
- लालकृष्ण आडवाणी
- बलराज मधोक
- बच्छराज व्यास
- अमित शाह
इसके उलट, पार्टी ने कई बार वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को भी कमान सौंपी है। कुशाभाऊ ठाकरे 76 वर्ष की उम्र में अध्यक्ष बने और वे भाजपा के अब तक के सबसे उम्रदराज अध्यक्ष रहे। वहीं, बंगारू लक्ष्मण 61 वर्ष की उम्र में अध्यक्ष बने, हालांकि बाद में उनका कार्यकाल विवादों में घिर गया।
नितिन नवीन: संगठन और सरकार दोनों में संतुलन
नितिन नवीन का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर संतुलन साधने वाले नेता माने जाते हैं। बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय नितिन नवीन को पार्टी के भीतर एक मजबूत संगठनकर्ता, कुशल मैनेजर और जमीनी नेता के रूप में देखा जाता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार—
- उनका ग्राउंड कनेक्ट मजबूत है
- संगठनात्मक निर्णयों में मैनेजमेंट स्किल्स प्रभावी रही हैं
- चुनावी रणनीति और कैडर मैनेजमेंट में उनकी पकड़ मानी जाती है
यही कारण है कि उन्हें भाजपा की आने वाली राष्ट्रीय रणनीति के लिए अहम चेहरा माना जा रहा है।
2029 की तैयारी और युवा नेतृत्व का संदेश
भाजपा सूत्रों का मानना है कि नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाना सिर्फ संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि 2029 लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर की गई दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी युवा नेतृत्व को आगे लाकर यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा आने वाले दशक की राजनीति के लिए खुद को तैयार कर रही है।
क्या भाजपा में शुरू होगा नया अध्याय?
अगर नितिन नवीन औपचारिक रूप से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो यह फैसला—
- उम्र के लिहाज से ऐतिहासिक होगा
- संगठनात्मक प्रतीकवाद में बड़ा संदेश देगा
- वाजपेयी–आडवाणी–अमित शाह की परंपरा को आगे बढ़ाएगा
कुल मिलाकर, नितिन नवीन की संभावित ताजपोशी को भाजपा में नई पीढ़ी के नेतृत्व के उदय के रूप में देखा जा रहा है—जो पार्टी की भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।


