पटना, 16 मार्च:बिहार में संभावित भीषण गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस संबंध में सोमवार को राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को गर्मी से निपटने के लिए पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए गए।
बैठक में स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, परिवहन, ऊर्जा, शिक्षा, नगर विकास एवं आवास सहित कुल दस विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव शामिल हुए। इस दौरान के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि राज्य में अप्रैल के मध्य से लेकर मई और जून तक हीटवेव की स्थिति बनने की आशंका है। इसे देखते हुए सभी विभागों को पहले से तैयार रहने और आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।
बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी विभाग निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के आधार पर तुरंत काम शुरू करें। सार्वजनिक स्थानों जैसे बस स्टैंड, बाजार, चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लोगों के लिए प्याऊ की व्यवस्था की जाए, ताकि गर्मी के दौरान लोगों को आसानी से पीने का पानी उपलब्ध हो सके। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकरों से भी जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव ने पेयजल आपूर्ति को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि सभी पेयजल पाइपलाइनों की समय रहते मरम्मत कर ली जाए और पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकर तैयार रखे जाएं। साथ ही जलस्तर की नियमित निगरानी करते हुए जरूरत पड़ने पर त्वरित राहत पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया कि अप्रैल शुरू होने से पहले सभी सिविल सर्जन और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी अधिकारियों के साथ बैठक कर हीटवेव से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की जाए। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर ओआरएस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और लू से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए तय एसओपी का कड़ाई से पालन किया जाए।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को गर्मी और लू से बचाव के तरीके बताए जाएं और हर स्कूल में ओआरएस की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग को निर्देश दिया गया कि खुले में काम करने वाले मजदूरों, निर्माण स्थलों और कारखानों में काम कर रहे श्रमिकों के लिए पीने के पानी, छाया, आइस पैक और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा गर्मी के मौसम में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने तथा ढीले और खराब बिजली तारों की मरम्मत करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि आग लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
मुख्य सचिव ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर भी अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लू की स्थिति में सुबह 11 बजे से दोपहर 3:30 बजे के बीच सार्वजनिक परिवहन के संचालन को नियंत्रित या सीमित किया जा सकता है। साथ ही बसों में पेयजल, ओआरएस और प्राथमिक उपचार किट रखने तथा बस स्टैंडों पर लगे हैंडपंपों को समय रहते दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।
मनरेगा सहित अन्य कार्यस्थलों पर भी मजदूरों के लिए पेयजल, छाया और लू लगने की स्थिति में तुरंत प्राथमिक उपचार की व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने तथा गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पशु-पक्षियों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि चिन्हित स्थानों पर पानी के गड्ढे बनाकर पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की जाए और चल चिकित्सा वाहनों के माध्यम से उनकी निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया जाए।
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव अविनाश कुमार और विशेष कार्य पदाधिकारी संदीप कुमार सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार गर्मी और लू की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां समय रहते पूरी करने पर जोर दे रही है, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।


