प्रशांत किशोर की मीडिया ब्रीफिंग: “समृद्धि यात्रा नहीं, जमीनी सच्चाई से दूरी का प्रतीक”

लखीसराय, 23 मार्च 2026: राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज अभियान के सूत्रधार ने लखीसराय में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बिहार सरकार की “समृद्धि यात्रा” पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह यात्रा राज्य की वास्तविक स्थिति को दर्शाने के बजाय एक “दिखावटी कार्यक्रम” बनकर रह गई है, जो आम जनता की समस्याओं से पूरी तरह कटी हुई है।

प्रशांत किशोर ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस “आत्मनिर्भर भारत” के नाम पर जनता को कभी नोटबंदी के दौरान लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा, आज उसी जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पेट्रोल, जो पहले ₹50 के आसपास मिलता था, आज ₹100 के पार पहुंच चुका है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा है।

उन्होंने बिहार की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में गरीबी की स्थिति बेहद गंभीर है। उनके अनुसार, “बिहार में 100 में से लगभग 60 लोग ऐसे हैं, जो दिनभर मेहनत करने के बावजूद ₹100 भी नहीं कमा पा रहे हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी आबादी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है, तब सरकार “समृद्धि यात्रा” जैसे कार्यक्रमों के जरिए किस समृद्धि का प्रदर्शन कर रही है।

अफसरों और नेताओं पर भी साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में राज्य के अफसरों और नेताओं पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के कई प्रभावशाली लोग राज्य के विकास की बात करने के बजाय विदेशों में संपत्ति बनाने में व्यस्त हैं।

उन्होंने कहा कि “बिहार के अफसर और नेता यहां की जमीन छोड़कर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों में जमीन खरीद रहे हैं और वहां घर बना रहे हैं। वहीं, बिहार के आम लोग, खासकर युवा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।”

पलायन और मूलभूत सुविधाओं की कमी पर चिंता
प्रशांत किशोर ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के कई मजदूर और कामगार गैस और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों से वापस लौट रहे हैं। उन्होंने इसे राज्य की नीतिगत विफलता करार दिया।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि बिहार में अभी भी रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे की भारी कमी है, जिसके कारण लोगों को अपने घर-परिवार से दूर रहकर दूसरे राज्यों में काम करना पड़ता है।

सरकार से जवाबदेही की मांग
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रशांत किशोर ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या “समृद्धि यात्रा” वास्तव में राज्य के विकास का सही चित्र पेश करती है, या फिर यह केवल राजनीतिक प्रचार का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह जमीनी स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर ध्यान दे, ताकि बिहार के लोगों को अपने ही राज्य में बेहतर जीवन मिल सके।

निष्कर्ष
लखीसराय में हुई इस मीडिया ब्रीफिंग के जरिए प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बिहार की मौजूदा स्थिति और सरकारी दावों के बीच के अंतर को उजागर करने की कोशिश की। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या “समृद्धि यात्रा” वास्तव में राज्य के विकास में कोई ठोस बदलाव ला पाती है या नहीं।

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