नवादा: बिहार की राजनीति में जन सुराज अभियान के सूत्रधार ने एक बार फिर परिवारवाद के मुद्दे पर तीखा हमला बोला है। रविवार को नवादा में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि देश की राजनीति में परिवारवाद गहराई तक जड़ जमा चुका है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि चाहे नेता खुद को समाजवादी कहें या भाजपा से जुड़े हों, युवा हों या वरिष्ठ, अगड़े हों या पिछड़े—लगभग सभी नेता अपने परिवार और खासकर अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में लगे हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “नेताओं का बच्चा कभी बेरोजगार नहीं रहेगा, उसे मजदूरी करने की नौबत नहीं आएगी, लेकिन आम जनता का पढ़ा-लिखा बच्चा भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है।”
“अपने बच्चों के भविष्य के लिए जनता खुद जागरूक बने”
पीके ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि आम लोग खुद अपने बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर हों। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों से उम्मीद करने के बजाय जनता को अपने अधिकार और अवसरों के लिए सजग होना होगा, तभी स्थिति बदलेगी।
नीतीश कुमार और उनके बेटे पर सीधा सवाल
मीडिया से बातचीत में पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कभी अपने परिवार के लिए राजनीति का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “आज हम देख रहे हैं कि उनका बेटा राजनीति में सक्रिय हो रहा है और भविष्य में जेडीयू का नेतृत्व करने की संभावना भी जताई जा रही है। सवाल यह है कि उनकी योग्यता क्या है और उन्होंने समाज के लिए अब तक क्या काम किया है?”
बिहार की राजनीति में बढ़ती बयानबाजी
प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। परिवारवाद को लेकर उठाए गए सवालों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी आने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए राज्य में इस तरह की बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। वहीं, जनता के बीच रोजगार और अवसर जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।


