बिहार बदलाव तक घर नहीं लौटेंगे प्रशांत किशोर! बिहटा आश्रम से चलाएंगे ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’

पटना/दरभंगा, 21 मई 2026। जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति और राज्य के भविष्य को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि जब तक बिहार में वास्तविक बदलाव नहीं होगा, तब तक वे अपने घर वापस नहीं लौटेंगे। अब वे पटना के बिहटा स्थित जन सुराज नव निर्माण आश्रम में रहकर राज्यव्यापी अभियान चलाएंगे। इस घोषणा के बाद बिहार की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

दरभंगा के लहेरियासराय स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित बिहार नवनिर्माण अभियान कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर ने यह घोषणा की। कार्यक्रम में जन सुराज से जुड़े विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने बिहार की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था, बेरोजगारी, पलायन, पेपर लीक और सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में सिर्फ सरकार बदलने से हालात नहीं बदलते। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता आज भी उन्हीं समस्याओं से जूझ रही है, जिनसे वर्षों पहले परेशान थी। उनके अनुसार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे मुद्दों पर अब भी ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा।

उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं का सबसे बड़ा संकट बेरोजगारी है। चुनाव के दौरान बड़े-बड़े रोजगार के वादे किए गए, लेकिन जमीन पर स्थिति नहीं बदली। लाखों युवा आज भी नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार का युवा मजदूरी और छोटे रोजगार के लिए राज्य छोड़ने को विवश है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान एक करोड़ रोजगार देने की बातें की गई थीं, लेकिन सरकार बनने के महीनों बाद भी कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर बिहार के युवाओं को कब तक सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहेगा।

जन सुराज प्रमुख ने अपने संबोधन में परिवारवाद के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे कुछ लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों को राजनीति में स्थापित करने में लगे हुए हैं, जबकि आम नौजवान रोजगार और भविष्य को लेकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति को परिवार और जाति से ऊपर उठाकर विकास और शिक्षा की राजनीति की जरूरत है।

प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की प्राथमिकता बिहार की जनता नहीं बल्कि बड़े उद्योगपतियों और बाहरी परियोजनाओं पर ज्यादा केंद्रित दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जनता को अस्पताल, शिक्षा और रोजगार की जरूरत है, लेकिन सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित है।

उन्होंने उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़ी प्रस्तावित आंख अस्पताल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार बड़े निवेश की बात कर रही है, लेकिन जनता के बुनियादी सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। उन्होंने पीरपैंती बिजली परियोजना को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि सरकार को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।

अपने भाषण के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अब बिहार में परीक्षा का पेपर लीक होना सामान्य खबर बन चुकी है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि असली खबर तब होगी जब कोई परीक्षा बिना पेपर लीक के संपन्न हो जाए।

उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक युवाओं का भविष्य लगातार प्रभावित होता रहेगा। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत लोगों के हाथ में व्यवस्था होने के कारण युवाओं का भरोसा टूटता जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर का बिहटा आश्रम में रहकर अभियान चलाने का फैसला केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह बिहार में लंबे राजनीतिक संघर्ष की तैयारी का संकेत भी माना जा रहा है। जन सुराज अभियान पहले से ही गांव-गांव तक संगठन विस्तार और जनसंवाद कार्यक्रम चला रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने प्रशांत किशोर के फैसले का स्वागत किया। कई लोगों का कहना था कि बिहार को नई सोच और नई राजनीति की जरूरत है। वहीं विरोधी दलों ने उनके बयान को राजनीतिक स्टंट करार दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत किशोर लगातार खुद को पारंपरिक राजनीति से अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। वे सीधे जनता से संवाद, गांव स्तर पर अभियान और सामाजिक मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

बिहार की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से रोजगार, शिक्षा, पलायन और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर इन मुद्दों को लेकर लगातार सरकार को घेरते रहे हैं। उनके हालिया बयान को आगामी राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

दरभंगा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बिहार का विकास केवल नारों से नहीं होगा। इसके लिए ईमानदार राजनीतिक इच्छाशक्ति और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने समर्थकों से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने की अपील की।

प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका अभियान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य के लिए है। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज आंदोलन का उद्देश्य राज्य को बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, रोजगार और पारदर्शी शासन देना है।

फिलहाल उनके इस ऐलान के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में बिहटा स्थित आश्रम से चलने वाला जन सुराज अभियान राज्य की राजनीति में कितना असर डालता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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