
झंझारपुर। बिहार की राजनीति में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे जन सुराज अभियान के सूत्रधार ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। शुक्रवार को झंझारपुर में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी को अगर कोई वास्तविक चुनौती दे सकता है तो वह केवल जन सुराज है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस पिछले चार दशकों से इस सीट पर प्रभावी उपस्थिति तक दर्ज नहीं करा सके हैं, ऐसे में उनके द्वारा बीजेपी को हराने की बात करना केवल राजनीतिक बयानबाजी भर है।
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर को समझे बिना चुनावी गणित की चर्चा करना बेकार है। उनके अनुसार यह सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है और विपक्षी दल यहां कभी गंभीर चुनौती खड़ी नहीं कर पाए। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह जनता के बीच अपनी पकड़ बनाई है, उसी के कारण अब पहली बार बीजेपी के सामने असली मुकाबले की स्थिति बन रही है।
उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में जनता अब पारंपरिक दलों से थक चुकी है। लोग लंबे समय से एक ऐसे विकल्प की तलाश में हैं जो जातीय समीकरणों और पुराने राजनीतिक नारों से आगे निकलकर काम और व्यवस्था परिवर्तन की बात करे। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि राजद और कांग्रेस जैसे दल वर्षों से केवल वोट बैंक की राजनीति करते रहे, लेकिन उन्होंने जनता के जीवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं लाया।
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने बांकीपुर सीट का जिक्र करते हुए कहा कि वहां राजद और कांग्रेस की स्थिति इतनी कमजोर रही है कि वे कई चुनावों में सम्मानजनक वोट तक हासिल नहीं कर सके। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो दल दशकों तक आधा वोट भी नहीं जुटा पाए, वे आज बीजेपी को हराने की बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक जनता अब यह समझ चुकी है कि केवल नारे और गठबंधन बनाने से चुनाव नहीं जीते जाते, बल्कि जमीनी भरोसा और निरंतर जनसंपर्क जरूरी होता है।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि जन सुराज का उद्देश्य सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि बिहार में एक नई राजनीतिक संस्कृति स्थापित करना है। उन्होंने दावा किया कि उनकी टीम गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर विकास की राजनीति चाहती है।
इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते जन असंतोष को लेकर भी अपनी बात रखी। तथाकथित “कॉकरोच जनता पार्टी” को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर करीब 20 मिलियन लोग किसी एक मंच पर आकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, तो यह किसी भी सरकार के लिए चिंता की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर लोगों का असंतोष इस बात का संकेत है कि वर्तमान व्यवस्था से बड़ी संख्या में लोग खुश नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यदि लोग सोशल मीडिया या किसी सार्वजनिक मंच पर लगातार अपनी समस्याएं और गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं, तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि देश और बिहार दोनों जगह लोगों के भीतर व्यवस्था को लेकर गहरी बेचैनी है, जिसे पारंपरिक राजनीतिक दल समझने में असफल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज युवा रोजगार की तलाश में परेशान हैं, किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था बदहाल स्थिति में है। इसके बावजूद सरकारें केवल प्रचार और राजनीतिक अभियानों में व्यस्त हैं। उनके अनुसार यही कारण है कि लोगों के बीच वैकल्पिक राजनीति को लेकर उत्साह बढ़ रहा है।
मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ता और विपक्ष दोनों जनता का भरोसा खो चुके हैं। एक तरफ सरकार विकास के दावों में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष केवल बयानबाजी तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की राजनीति लंबे समय से कुछ परिवारों और सीमित समूहों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जिससे आम लोगों की समस्याएं पीछे छूट गईं।
उन्होंने यह भी कहा कि जन सुराज आने वाले समय में बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उनके मुताबिक संगठन तेजी से गांवों और कस्बों में मजबूत हो रहा है और बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं तथा पढ़े-लिखे लोग इससे जुड़ रहे हैं। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बिहार की राजनीति में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले चुनावों में इसका असर साफ दिखाई देगा।
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि जन सुराज पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। हालांकि उम्मीदवार के नाम को लेकर उन्होंने खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर संकेत दिया कि पार्टी ऐसे चेहरे को सामने लाएगी जो स्थानीय जनता के बीच स्वीकार्य हो और विकास के मुद्दों पर गंभीरता से काम कर सके।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो प्रशांत किशोर के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। खासतौर पर बांकीपुर जैसी सीट पर जहां बीजेपी लंबे समय से मजबूत स्थिति में रही है, वहां जन सुराज की चुनौती को लेकर राजनीतिक दलों की नजरें अब और ज्यादा सक्रिय हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जन सुराज अपने दावों को जमीनी स्तर पर कितना मजबूत साबित कर पाता है और क्या वह वास्तव में पारंपरिक दलों के समीकरण को बदलने में सफल होगा।


