नालंदा में प्रशांत किशोर का हमला: “परिवारवाद से जनता परेशान, बिहार के युवा मजबूर होकर कर रहे मजदूरी”

नालंदा: राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने नालंदा में मीडिया से बातचीत के दौरान बिहार की सियासत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने परिवारवाद, बेरोजगारी और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए।

परिवारवाद पर साधा निशाना

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की राजनीति लंबे समय से परिवारवाद के इर्द-गिर्द घूम रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि
“नीतीश कुमार, लालू यादव और रामविलास पासवान के परिवार के लोग सत्ता में बने रहेंगे, जबकि बिहार के आम परिवारों के बच्चे रोजगार के लिए बाहर जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं।”

उन्होंने इसे राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताया और कहा कि जब तक राजनीति में आम लोगों की भागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।

युवाओं के पलायन पर चिंता

पीके ने बिहार के युवाओं के पलायन को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि लाखों युवा बेहतर भविष्य की तलाश में दूसरे राज्यों में काम करने को मजबूर हैं, जो सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाता है।

नीतीश कुमार पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पहले ही दावा किया था कि नीतीश कुमार चुनाव नहीं जीत पाएंगे।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनका आकलन इसलिए गलत साबित हुआ क्योंकि चुनावी प्रक्रिया पर बड़े पैमाने पर असर डाला गया।

चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि चुनाव में धनबल, सरकारी तंत्र और संस्थाओं का दुरुपयोग हुआ।
उन्होंने कहा कि
“चुनाव को प्रभावित किया गया, वोट खरीदे गए और यही कारण है कि वास्तविक जनसमर्थन के बावजूद नतीजे अलग आए।”

202 विधायकों के समर्थन पर सवाल

पीके ने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री के पास 200 से अधिक विधायकों का समर्थन था, तो फिर उन्हें पद छोड़ने की नौबत क्यों आई।
उन्होंने इसे राजनीतिक अस्थिरता और अंदरूनी दबाव का संकेत बताया।

राजनीतिक बदलाव की जरूरत

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार को अब नई राजनीति और नए नेतृत्व की जरूरत है, जो विकास और रोजगार को प्राथमिकता दे।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पारंपरिक राजनीति से हटकर बदलाव के लिए आगे आएं।

निष्कर्ष:
नालंदा में प्रशांत किशोर की यह मीडिया ब्रीफिंग बिहार की मौजूदा राजनीति पर सीधा हमला मानी जा रही है। परिवारवाद, बेरोजगारी और चुनावी प्रक्रिया जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

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